CJP नेताओं की हिरासत पर कोर्ट का फैसला, सौरव दास और रांका रिहा

नई दिल्ली : जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को आखिरकार अदालत से राहत मिल गई है। बुधवार को दोनों नेताओं को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश किया गया

सौरव दास

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नई दिल्ली : जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को आखिरकार अदालत से राहत मिल गई है। बुधवार को दोनों नेताओं को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश किया गया था। दिल्ली पुलिस ने दोनों की न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रखने के बाद दोनों को जमानत दे दी। मालूम हो कि इससे पहले सोमवार को भी दोनों नेताओं को मंदिर मार्ग थाने में नवनियुक्त विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था। उस समय पुलिस की मांग पर मजिस्ट्रेट ने दोनों की न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी थी। अब अदालत से जमानत मिलने के बाद दोनों नेताओं को राहत मिली है।

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिए गए थे नेता

सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के मामले में हिरासत में लिया गया था। आरोप है कि प्रतिबंध लागू होने के बावजूद दोनों नेता और CJP के अन्य कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पार कर जंतर-मंतर परिसर में दाखिल हुए थे। वहां उन्होंने तिरंगा लहराया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद पुलिस ने दोनों नेताओं को हिरासत में ले लिया था। 13 अक्टूबर को उन्हें पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया था। दोनों पर पहले से तय बेल बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने का भी आरोप लगाया गया। इसी मामले में शामिल तीसरे नेता अजिंक्य शिंदे को अदालत से राहत मिली थी। उनसे नया बेल बॉन्ड भरवाकर रिहाई की प्रक्रिया पूरी की गई थी।

अभिजीत दिपके ने पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल

CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने पार्टी नेताओं के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। उन्होंने पूछा था कि क्या अब राष्ट्रीय ध्वज फहराना भी गैरकानूनी हो गया है? दिपके ने कहा था कि आशुतोष रांका और सौरव दास को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि दोनों की गलती क्या थी – जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना? उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा था कि यदि सरकार विरोध की आवाज दबाने के लिए दृढ़ है, तो उसे कथित तौर पर ऐसे तरीकों का सहारा लेने के बजाय आधिकारिक रूप से आपातकाल घोषित करने की हिम्मत दिखानी चाहिए।

अजिंक्य शिंदे ने मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का लगाया आरोप

CJP नेता अजिंक्य शिंदे ने आरोप लगाया था कि जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराने और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाने के कारण आशुतोष रांका और सौरव दास को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। शिंदे ने कहा था कि आशुतोष के जन्मदिन पर ही उन्हें जेल भेज दिया गया। उन्होंने मोदी-शाह सरकार पर अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करने और लोगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जेल भेजकर नेताओं को डराने की कोशिश सफल नहीं होगी और वे सिर ऊंचा करके जेल जा रहे हैं।

SIR को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ कर रहे थे प्रदर्शन

CJP और विपक्षी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। इन दलों का आरोप है कि पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। इसी मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। चुनाव आयोग ने पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि जिन मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं, वे दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। CJP की मांग है कि SIR से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही तय की जाए और मुख्य चुनाव आयुक्त अपने पद से इस्तीफा दें।

पहले भी हिरासत में लिए गए थे CJP नेता

इससे पहले 10 अक्टूबर को CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को भी पुलिस ने हिरासत में लिया था। बाद में 11 अक्टूबर को उन्हें एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर रिहा कर दिया गया था। हालांकि, अभिजीत दिपके ने दावा किया था कि उन्होंने ऐसा कोई बॉन्ड नहीं भरा था, जो उन्हें आगे प्रदर्शन करने से रोकता हो। इसके बाद पार्टी ने अपना विरोध जारी रखने का फैसला किया।

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