रांची: झारखंड में चिकित्सकों के अधिकार, सम्मान, सेवा शर्तों और स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार को लेकर चल रहे संयुक्त चिकित्सक आंदोलन को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, अजय कुमार सिंह के साथ हुई बैठक में भारतीय चिकित्सा संघ और झासा सहित विभिन्न चिकित्सक संगठनों की प्रमुख मांगों को स्वीकार करते हुए उनके क्रियान्वयन के लिए आवश्यक कार्रवाई और समय सीमा निर्धारित करने पर सहमति बनी। बैठक में चिकित्सकों की सेवा में पदोन्नति, निजी अस्पतालों के पंजीकरण, चिकित्सा संस्थानों के प्रमाणन और रेजिडेंट चिकित्सकों के प्रोत्साहन सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सकारात्मक निर्णय लिए गए।
न्यूनतम बिस्तरों की अनिवार्यता के संबंध में ग्रामीण क्षेत्रों में 30 और शहरी क्षेत्रों में 40 बिस्तरों की व्यवस्था पर बनी सहमति
बैठक में चिकित्सा संस्थानों के पंजीकरण से संबंधित कानून में आवश्यक संशोधन करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए अगले दो माह में प्रस्ताव मंत्रिमंडल की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। इसके लिए विभाग के स्तर पर एक समन्वय समिति का गठन किया जाएगा जो मांगों को लागू करने से संबंधित विषयों पर अग्रेतर कार्रवाई करेगा। अस्पतालों में न्यूनतम बिस्तरों की अनिवार्यता के संबंध में ग्रामीण क्षेत्रों में 30 और शहरी क्षेत्रों में 40 बिस्तरों की व्यवस्था पर सहमति बनी।
चिकित्सकों को समयबद्ध पदोन्नति के लिए केंद्र सरकार और बिहार में लागू प्रासंगिक प्रावधानों के आधार पर व्यवस्था करने पर सहमति बनी। इसका लाभ सामान्य चिकित्सकों, दंत चिकित्सकों और दोनों संवर्गों के विशेषज्ञ चिकित्सकों को देने का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। इस संबंध में वित्त विभाग भाग के साथ बैठक कर समस्या का समाधान निकाला जाएगा।
चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए पूर्व में डीएसपी स्तर के पदाधिकारी को नोडल पदाधिकारी नामित किया जाता था पूर्व की व्यवस्था को फिर से लागू करने का निर्णय लिया गया ताकि चिकित्सकों की संपूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।इसके साथ आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से संबंधित टू टियर पर भी विचार किया गया
चिकित्सा संस्थानों के पंजीकरण एवं प्रमाणन की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए एकल खिड़की व्यवस्था लागू करने की मांग स्वीकार कर ली गई। इससे अस्पतालों और अन्य चिकित्सा संस्थानों को विभिन्न प्रक्रियाओं के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद है।
बैठक में इंटर्न, कनिष्ठ रेजिडेंट और वरिष्ठ रेजिडेंट चिकित्सकों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि के भुगतान में अनियमितताओं को दूर कर व्यवस्था नियमित करने पर सहमति बनी।
चिकित्सक संगठनों ने बैठक के परिणामों को संयुक्त आंदोलन की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। संगठनों का कहना है कि चिकित्सकों की एकजुटता, निरंतर संवाद और स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के प्रति प्रतिबद्धता के कारण यह सकारात्मक परिणाम सामने आया है। चिकित्सा फिलहाल हड़ताल पर नहीं जाएंगे। छठ के बाद एक बार फिर से बैठक होगी जिस पर अन्य मुद्दों पर चर्चा होगी।
बैठक में ये रहे शामिल
इस बैठक में विभाग की ओर से विशेष सचिव डॉक्टर नेहा अरोड़ा, संयुक्त सचिव ललित मोहन शुक्ला उपस्थित थे। डॉक्टरों की टीम से डॉक्टर अजय कुमार सिंह, पैटरन, आईएमए, डॉक्टर प्रदीप कुमार सिंह, सचिव, आईएमए, झारखंड, डॉ योगेश गंभीर, डॉ मृत्युंजय सिंह, सचिव झासा, डॉक्टर विमलेश कुमार सिंह, अध्यक्ष, झासा, डॉक्टर शंभू प्रसाद सिंह, सचिव एचबीआई, डॉक्टर अभिषेक रामाधीन, राज्य समन्वयक, एचबीआई, डॉ अजीत, डॉ कृष्ण मुरारी, डॉक्टर स्टीफन खेस, डॉ विकास, डॉ राजेश, डॉ उषा सिंह, डॉक्टर रंजू सिंह और डॉक्टर विकास शामिल थे।



