रांची : झारखंड छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरे और छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो ने एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए राज्य सरकार द्वारा JSSC-CGL समेत अन्य परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले को छात्रों की ऐतिहासिक जीत करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह लंबे संघर्ष और आंदोलन के पहले चरण की सफलता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है और अब आंदोलन का दूसरा चरण शुरू होगा, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य की पूरी भर्ती और परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी व भ्रष्टाचार मुक्त बनाना है।
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मीडिया और CM हेमंत सोरेन का जताया आभार
देवेंद्रनाथ महतो ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया का विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आंदोलन की हर छोटी-बड़ी गतिविधि को जनता तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका सराहनीय रही। इसके साथ ही उन्होंने CM हेमंत सोरेन और देश-दुनिया से आंदोलन का समर्थन करने वाले तमाम लोगों के प्रति धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक कार्रवाइयों, मशाल जुलूस, विधानसभा घेराव और तिरंगा यात्रा जैसी मुश्किलों से गुजरते हुए छात्रों ने अपनी आवाज बुलंद की, जिसके सामने सरकार को यह कदम उठाना पड़ा।
दूसरे चरण में व्यवस्था सुधार पर रहेगा फोकस
छात्र नेता ने कहा कि आंदोलन का दूसरा चरण परीक्षाओं में स्थायी सुधार सुनिश्चित करने के लिए होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि 14 परीक्षाएं रद्द होने के बाद भी यदि तंत्र में बदलाव नहीं किया गया, तो भविष्य में पेपर लीक और धांधली की घटनाएं फिर से दोहराई जा सकती हैं। इसलिए सरकार को यह गारंटी देनी होगी कि आने वाले समय में ऐसी गड़बड़ी नहीं होगी।
निगरानी समिति और पारदर्शी प्रक्रिया की मांग
भर्ती व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए देवेंद्रनाथ महतो ने मांग की कि परीक्षाओं की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र समिति का गठन किया जाए। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि पूरी भर्ती प्रक्रिया की जांच तीन चरणों में हो और प्रत्येक चरण के पूरा होने पर संबंधित एजेंसी को क्लियरेंस सर्टिफिकेट जारी किया जाए। यदि इसके लिए नियमों या कानूनों में संशोधन की जरूरत पड़े, तो सरकार को उसे तुरंत लागू करना चाहिए।
‘भूख हड़ताल रुकी है, टेंट नहीं हटेगा’
भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को जारी रखने की बात कहते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल सामूहिक भूख हड़ताल को विराम दिया गया है, लेकिन आंदोलन स्थल से टेंट नहीं हटाया जाएगा। जब तक सरकार भविष्य में निष्पक्ष परीक्षा की ठोस संवैधानिक गारंटी नहीं देती, तब तक सांकेतिक विरोध जारी रहेगा।
CBI जांच और प्रभावित छात्रों पर रुख
सीबीआई (CBI) जांच की मांग पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि वे हमेशा छात्रों की जायज मांगों के साथ खड़े हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि परीक्षा रद्द होने से दोनों तरफ के वास्तविक (जेनुइन) अभ्यर्थी प्रभावित हुए हैं। इसलिए सरकार को ऐसा बीच का रास्ता या समाधान निकालना चाहिए, जिससे ईमानदार छात्रों का करियर सुरक्षित रहे और उन्हें पढ़ाई छोड़कर सड़कों पर न उतरना पड़े।








