रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड आर्म्ड पुलिस (JAP) में चतुर्थवर्गीय कर्मचारी के पद पर नियुक्त दिकेश कुमार समेत अन्य याचिकाकर्ताओं को बड़ी राहत दी है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि सेवा समाप्ति से लेकर पुनर्बहाली तक की पूरी अवधि का बकाया वेतन और सभी परिणामी सेवा लाभ आठ सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ताओं को दिए जाएं।
यह मामला वर्ष 2016 में झारखंड आर्म्ड पुलिस में चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़ा है। नियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की शिकायत के बाद राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द करते हुए संबंधित कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं।
2016 की नियुक्तियों में कथित अनियमितता के बाद हुई थी कार्रवाई
मामले की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस दीपक रौशन की अदालत में हुई। संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पूर्व में सेवा समाप्ति के आदेश को रद्द कर दिया था और याचिकाकर्ताओं को परिणामी सेवा लाभ का हकदार माना था। हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में राज्य सरकार ने याचिकाकर्ताओं को दोबारा सेवा में बहाल कर दिया। हालांकि, सरकार ने ‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ के सिद्धांत का हवाला देते हुए सेवा से बाहर रहने की अवधि का वेतन देने से इनकार कर दिया।
बर्खास्तगी अवधि के वेतन को लेकर फिर हाईकोर्ट पहुंचे कर्मचारी
सरकार के इस फैसले के खिलाफ दिकेश कुमार एवं अन्य ने अधिवक्ता चंचल जैन के माध्यम से हाईकोर्ट का दोबारा रुख किया।याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि सेवा से बाहर रहने की अवधि में उनकी कोई गलती या स्वैच्छिक कार्रवाई नहीं थी। उन्हें सरकार के आदेश के कारण सेवा से बाहर रहना पड़ा था। ऐसे में उस अवधि का वेतन रोकना उचित नहीं है। याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी दलील दी गई कि हाईकोर्ट का पूर्व आदेश अंतिम हो चुका था और राज्य सरकार ने उस आदेश को अपील में चुनौती नहीं दी थी।
हाईकोर्ट ने सरकार के तर्क को किया खारिज
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के ‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ वाले तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को सेवा से बाहर रहने की पूरी अवधि का वेतन और अन्य परिणामी सेवा लाभ देने का निर्देश दिया। अदालत के आदेश के अनुसार सेवा समाप्ति से लेकर पुनर्बहाली तक की अवधि का पूरा बकाया वेतन और संबंधित सेवा लाभ आठ सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराना होगा।
कर्मचारियों को मिलेंगे परिणामी सेवा लाभ
हाईकोर्ट के आदेश से न सिर्फ बकाया वेतन का रास्ता साफ हुआ है, बल्कि याचिकाकर्ताओं को उनकी सेवा अवधि से जुड़े परिणामी लाभ भी मिलने का निर्देश दिया गया है। अब राज्य सरकार को निर्धारित आठ सप्ताह की अवधि में अदालत के आदेश का अनुपालन करना होगा।