रांची: केंद्र सरकार द्वारा खनन एवं खनिज विकास एवं विनियमन (MMDR) कानून में किए गए संशोधन के विरोध में कांग्रेस ने झारखंड में राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। प्रदेश कांग्रेस महासचिव आलोक कुमार दूबे ने कहा कि 27 अगस्त से शुरू होने वाला यह आंदोलन झारखंड के जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा पर राज्य के संवैधानिक एवं आर्थिक अधिकारों की लड़ाई है।
आलोक कुमार दूबे ने बताया कि 27 अगस्त को सभी जिला मुख्यालयों पर धरना दिया जाएगा और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके बाद आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से राज्य और प्रखंड स्तर तक ले जाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है। यदि राज्य को अपनी खनिज संपदा से मिलने वाले राजस्व और अधिकारों से वंचित करने का प्रयास किया गया तो कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। झारखंड की जनता अपने हक और अधिकार के लिए लोकतांत्रिक तरीके से सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष करेगी।
कृषि कानूनों का दिया उदाहरण
आलोक दूबे ने कहा कि पिछले करीब 12 वर्षों का इतिहास बताता है कि जब जनता किसी जनविरोधी फैसले के खिलाफ मजबूती से खड़ी हुई है, तो केंद्र सरकार को कई मौकों पर अपने फैसलों पर पुनर्विचार करना पड़ा है। उन्होंने तीन कृषि कानूनों का उदाहरण देते हुए कहा कि लंबे किसान आंदोलन के बाद नवंबर 2021 में केंद्र सरकार को इन कानूनों को वापस लेना पड़ा था।
उन्होंने कहा कि नागरिकता से जुड़े मुद्दों पर भी व्यापक जनविरोध के बाद सरकार को अपने रुख में बदलाव करना पड़ा। अब झारखंड के खनिज अधिकारों का सवाल सामने है। कांग्रेस जनता के अधिकारों की लड़ाई सड़क से सदन तक मजबूती से लड़ेगी।
जल-जंगल-जमीन के अधिकारों की रक्षा का दावा
आलोक दूबे ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि वनाधिकार और आदिवासी अधिकारों से जुड़े प्रावधानों में बदलाव के प्रयासों के समय भी कांग्रेस ने जनआंदोलन खड़ा किया था। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज, ग्रामीणों और जनसंगठनों के अधिकारों की रक्षा के लिए कांग्रेस लगातार संघर्ष करती रही है।
उन्होंने झारखंड की जनता से दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर प्राकृतिक संसाधनों और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि खनिज झारखंड का है तो उससे मिलने वाले अधिकार और न्यायपूर्ण हिस्सेदारी भी झारखंड की होनी चाहिए।
गांव से राज्य स्तर तक आंदोलन का ऐलान
प्रदेश कांग्रेस महासचिव ने कहा कि 27 अगस्त से शुरू होने वाला आंदोलन लंबी लड़ाई की शुरुआत है। यदि केंद्र सरकार ने झारखंड के हितों और राज्यों के अधिकारों को नजरअंदाज किया तो आंदोलन को गांव, पंचायत, प्रखंड, जिला और राज्य स्तर तक व्यापक बनाया जाएगा। जरूरत पड़ने पर कांग्रेस देशव्यापी स्तर पर भी आवाज उठाएगी।
उन्होंने कहा कि झारखंड की धरती ने देश को खनिज संपदा दी है और अब राज्य अपने अधिकारों से समझौता नहीं करेगा। जनता के हितों के खिलाफ कोई कानून थोपा गया तो कांग्रेस लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से उसका विरोध करेगी।



