नई दिल्ली : 26 जुलाई को देशभर में मनाए जाने वाले कारगिल विजय दिवस से पहले संसद के दोनों सदनों ने वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। राज्यसभा और लोकसभा में सांसदों ने अपने-अपने स्थान पर खड़े होकर मौन रखा और राष्ट्र की संप्रभुता तथा अखंडता की रक्षा में शहीद हुए जवानों को नमन किया। चूंकि इस वर्ष 26 जुलाई रविवार को पड़ रहा है, इसलिए संसद का सत्र उस दिन नहीं चलेगा। इसी कारण आज यानी शुक्रवार को कार्यवाही के दौरान दोनों सदनों में कारगिल के अमर वीरों को श्रद्धांजलि दी गई।
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राज्यसभा में सभापति ने किया शहीदों का स्मरण
राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि 26 जुलाई को पूरा देश कारगिल विजय दिवस मनाएगा। उन्होंने कहा कि यह दिन वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में भारत की ऐतिहासिक विजय का स्मरण करने के साथ उन वीर अधिकारियों और सैनिकों के अदम्य साहस, असाधारण वीरता और कर्तव्यनिष्ठा को सम्मान देने का अवसर है, जिन्होंने देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध केवल सैन्य विजय का प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय सशस्त्र बलों की अदम्य इच्छाशक्ति, अनुशासन, साहस और राष्ट्र के प्रति सर्वोच्च समर्पण का भी प्रतीक है। दुर्गम पहाड़ियों, प्रतिकूल मौसम और कठिन परिस्थितियों के बीच भारतीय जवानों ने असाधारण पराक्रम का परिचय देते हुए दुश्मन के कब्जे से रणनीतिक चौकियों को मुक्त कराया और देश की सीमाओं की सफलतापूर्वक रक्षा की।
इसके बाद सभापति सहित सभी सांसदों ने राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनकी स्मृति में कुछ क्षण का मौन रखा। सदन ने उन सभी सैनिकों के प्रति भी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की, जिनके साहस, दृढ़ संकल्प और निस्वार्थ सेवा ने देश की सुरक्षा सुनिश्चित की।
लोकसभा में भी दी गई श्रद्धांजलि
लोकसभा में भी कारगिल युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। सदन में वीर सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान को याद करते हुए उन्हें नमन किया गया और उनकी पावन स्मृति में मौन रखा गया। गौरतलब है कि हर वर्ष 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। वर्ष 1999 में भारतीय सेना ने कठिन सैन्य अभियान चलाकर कारगिल क्षेत्र में घुसपैठ कर कब्जा जमाने वाले पाकिस्तानी सैनिकों और घुसपैठियों को खदेड़ते हुए सभी रणनीतिक चोटियों पर दोबारा तिरंगा फहराया था।
भारतीय सेना की इस ऐतिहासिक विजय ने साहस, रणकौशल और सर्वोच्च बलिदान की गौरवशाली गाथा को इतिहास में अमर कर दिया। कारगिल विजय दिवस पर देशभर में शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है और उनके अदम्य साहस को कृतज्ञतापूर्वक याद किया जाता है।




