नई दिल्ली : केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में विपक्ष के लगातार जारी हंगामे पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है. विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जब विरोधी दल दोनों सदनों को चलने ही नहीं दे रहे हैं, तो वहां जाकर क्या होगा. इसके साथ ही गृहमंत्री ने स्पष्ट किया कि वे संसद में विपक्ष के किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. दूसरी तरफ तमिलनाडु की राजनीति में परिसीमन (Delimitation) के मुद्दे पर हलचल तेज हो गई है. राज्य के CM सी जोसेफ विजय ने बुधवार को विधानसभा में परिसीमन के खिलाफ एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया.
Read More : FCRA संशोधन विधेयक JPC के पास भेजा गया, लोकसभा में हुआ हंगामा
लोकसभा सीटों को 543 पर बनाए रखने की अपील
CM विजय द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव में केंद्र सरकार से लोकसभा की कुल सदस्य संख्या को स्थायी रूप से 543 पर ही बनाए रखने की अपील की गई है. सीएम विजय ने कहा कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होने में अब और देरी नहीं होनी चाहिए. उन्होंने 2029 के लोकसभा चुनावों में महिला आरक्षण लागू करने का समर्थन करते हुए कहा कि यह कोटा मौजूदा 543 सीटों के आधार पर ही तय होना चाहिए. उन्होंने कहा कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रमों को सफलता से लागू किया है, परिसीमन के कारण उन पर कोई विपरीत असर न पड़े, यह सुनिश्चित करना केंद्र की जिम्मेदारी है.
विपक्षी दल डीएमके ने किया प्रस्ताव का समर्थन
टीवीके सरकार के इस फैसले का मुख्य विपक्षी दल डीएमके (DMK) ने भी खुला समर्थन किया है. विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा कि लोकसभा में तमिलनाडु के मौजूदा प्रतिनिधित्व (7.18 फीसदी) में कोई कटौती नहीं होनी चाहिए. उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि परिसीमन के नाम पर तमिलनाडु के सांसदों की संख्या कम नहीं की जानी चाहिए. डीएमके का मानना है कि अगले 25 वर्षों तक निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन नहीं किया जाना चाहिए, ताकि बेहतर काम करने वाले राज्यों को इसका नुकसान न उठाना पड़े.




