चतरा : झारखंड के चतरा जिले में नाबालिग से कथित रूप से बाल मजदूरी कराने, मारपीट और प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप में पुलिस प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। SP अनिमेष नैथानी ने महिला थानेदार फिरदौस नाज और सदर थाना में पदस्थापित उनके पति पुलिस अवर निरीक्षक टीपू अंसारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई सदर अनुमंडल पुलिस अधिकारी (SDPO) सन्नी वर्धन की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है। निलंबन अवधि के दौरान दोनों पुलिस अधिकारियों को पुलिस लाइन में योगदान देने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही दोनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।
सरकारी आवास से हुई थी नाबालिग की बरामदगी
इस पूरे मामले की शुरुआत बाल कल्याण समिति (CWC) को मिली एक शिकायत से हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सदर थाना परिसर स्थित दारोगा दंपति के सरकारी आवास में एक नाबालिग से घरेलू काम कराया जाता है और उसके साथ मारपीट व प्रताड़ना की जाती है। सूचना मिलने के तुरंत बाद CWC की विशेष टीम ने कार्रवाई करते हुए सरकारी आवास से नाबालिग को रेस्क्यू किया था। रेस्क्यू के बाद समिति ने नाबालिग का मेडिकल परीक्षण कराया और उसे बाल संरक्षण गृह (CCI) भेज दिया। इसके बाद बेंच ऑफ मजिस्ट्रेट के समक्ष नाबालिग का बयान दर्ज कराया गया।
CWC और SP का बयान, FIR दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू
CWC अध्यक्ष नर्मदेश्वर सिंह ने बताया कि मामले की पूरी जानकारी जिले से लेकर राज्य स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी गई है। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए SP अनिमेष नैथानी ने SDPO सन्नी वर्धन को मामले की जांच सौंपी थी। जांच रिपोर्ट में आरोप सही पाए जाने पर निलंबन का कदम उठाया गया। SDPO सन्नी वर्धन ने बताया कि दोनों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने के लिए CWC का पत्र प्राप्त हो चुका है। सदर थाना प्रभारी को मामला दर्ज कर विधि-सम्मत कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।
इधर, नाबालिग की मां ने SP को आवेदन देकर CWC सदस्यों पर अपनी बेटी को जबरन ले जाने का आरोप लगाया था। हालांकि, CWC ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि नाबालिग को नियमानुसार रेस्क्यू किया गया है। SP ने साफ कहा है कि कानून के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई होगी और दोषी पाए जाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।



