नई दिल्ली : 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में हुए भयानक आतंकी हमलों की 25वीं बरसी पर पूरी दुनिया उस खौफनाक दिन को याद कर रही है। आतंकियों द्वारा चार यात्रियों के विमानों को हाईजैक कर न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की जुड़वां इमारतों और पेंटागन से टकराने के इस हमले में हजारों बेकसूर लोगों की जान चली गई थी। इस त्रासदी के 25 साल बीत जाने के बाद भी उस दिन का दर्द लोगों के मन में ताजा है। हालांकि, इस घटना के बाद अमेरिका ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा नीति को पूरी तरह बदल दिया, जिसके बाद वहां कोई दूसरा बड़ा आतंकी हमला नहीं हो सका।
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ग्लोबल वॉर ऑन टेरर और सैन्य कार्रवाई
9/11 के तुरंत बाद तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने आतंकवाद के खिलाफ ‘ग्लोबल वॉर ऑन टेरर’ (GWOT) का ऐलान किया। 20 सितंबर 2001 को तालिबान को चेतावनी देने के बाद 7 अक्तूबर 2001 को अमेरिका ने अफगानिस्तान में अल-कायदा और तालिबान के ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई शुरू की। इसके साथ ही आतंकियों के वित्तीय स्रोतों और संपत्तियों को फ्रीज कर दिया गया। आगे चलकर 19 मार्च 2003 को अमेरिका ने इराक में सद्दाम हुसैन की सरकार के खिलाफ भी सैन्य अभियान की शुरुआत की।
होमलैंड सिक्योरिटी विभाग का गठन
देश की आंतरिक सुरक्षा को नए सिरे से संगठित करने के लिए 25 नवंबर 2002 को ‘होमलैंड सिक्योरिटी एक्ट’ के तहत होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) की स्थापना की गई, जिसने मार्च 2003 से काम शुरू किया। 1947 में रक्षा विभाग के गठन के बाद यह अमेरिकी सरकार का सबसे बड़ा पुनर्गठन था। इसमें 22 अलग-अलग सरकारी एजेंसियों को मिलाकर एक ही कैबिनेट विभाग के अंतर्गत लाया गया ताकि सूचनाओं का बेहतर तालमेल हो सके। टॉम रिज इसके पहले सचिव बनाए गए।
पेट्रियट एक्ट से सुरक्षा एजेंसियों को मिले विशेषाधिकार
26 अक्टूबर 2001 को लागू किए गए ‘यूएसए पेट्रियट एक्ट’ ने अमेरिकी जांच और खुफिया एजेंसियों को अभूतपूर्व अधिकार दिए। इस कानून के तहत संदिग्धों की निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और एजेंसियों के बीच डेटा शेयरिंग को बेहद आसान बना दिया गया। मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादियों को वित्तीय मदद देने पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए। साथ ही 10 हजार डॉलर से अधिक नकदी के अवैध परिवहन और साइबर अपराधों से निपटने के लिए सख्त प्रावधान शामिल किए गए।
हवाई यात्रा की सुरक्षा में टीएसए (TSA) का गठन
विमानन सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए 19 नवंबर 2001 को ‘विमानन और परिवहन सुरक्षा अधिनियम’ (ATSA) के तहत ट्रांसपोर्टेशन सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन (TSA) की स्थापना की गई। हवाई अड्डों की सुरक्षा को संघीय नियंत्रण में लाया गया और यात्रियों व उनके सामान की शत-प्रतिशत चेकिंग अनिवार्य कर दी गई। इसके अलावा कॉकपिट के दरवाजों को मजबूत किया गया, फेडरल एयर मार्शल सेवा का विस्तार हुआ और जोखिम-आधारित अंतरराष्ट्रीय यात्री स्क्रीनिंग (NSEERS) शुरू की गई।
भारत के लिए क्या हैं मुख्य सबक?
9/11 के बाद अमेरिकी सुरक्षा मॉडल से भारत के लिए सबसे बड़ा सबक यह है कि आतंकवाद से निपटने के लिए केवल हमले के बाद की कार्रवाई काफी नहीं है। खुफिया एजेंसियों के बीच रियल-टाइम सूचना साझाकरण, आतंकी फंडिंग और ऑनलाइन कट्टरपंथ पर पहले से नजर रखना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही केंद्र व राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के बीच बेहतर तालमेल की व्यवस्था स्थापित करना समय की मांग है।






