नई दिल्ली। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि टाटा संस के पूर्व चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल में एक भारी-भरकम मंत्रालय की कमान संभाल सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उन्हें कैबिनेट में जगह मिल सकती है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
एन. चंद्रशेखरन ने हाल ही में टाटा ट्रस्ट बोर्ड के सदस्यों के साथ मतभेदों के चलते 12 अगस्त को टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने घोषणा की थी कि वह 20 फरवरी को अपना वर्तमान कार्यकाल समाप्त होने के बाद पुनर्नुयुक्ति नहीं
 63 वर्षीय चंद्रशेखरन भाजपा के प्रमुख पदों के लिए सामान्यतः निर्धारित 75 वर्ष की आयु सीमा से काफी नीचे हैं, जो उनके पक्ष में एक बड़ा फैक्टर माना जा रहा है।
 भाजपा सरकार द्वारा पूर्व में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े संकटों से निपटने के लिए बाहरी विशेषज्ञों (लेटरल एंट्री) पर भरोसा जताने की परंपरा रही है। उदाहरण के लिए, जेएनयू और जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शनों के बीच परीक्षा सुधारों के लिए बनाई गई उच्च स्तरीय समिति का अध्यक्ष इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी को बनाया गया था।
 मोदी सरकार के पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल में अब तक चार शिक्षा मंत्री (स्मृति ईरानी, प्रकाश जावेडकर, रमेश पोखरियाल और धर्मेंद्र प्रधान) रह चुके हैं, लेकिन किसी ना किसी वजह से सभी को अपना पद छोड़ना पड़ा।
 हाल ही में NEET-UG 2026 पेपर लीक कांड के बाद छात्रों के भारी विरोध और मांगों के चलते धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटा दिया गया था, जिसके बाद से प्रल्हाद जोशी अंतरिम तौर पर इस मंत्रालय को संभाल रहे हैं।
ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार इस बार लीक से हटकर किसी कॉरपोरेट या पेशेवर दिग्गज को पूर्णकालिक शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी सौंप सकती है। इसके मद्देनजर एन चंद्रशेखरन का नाम चर्चा में हैं।