रांची: आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो ने खनिज क्षेत्रों के विकास और मिनरल बेयरिंग लैंड सेस को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। 20 अगस्त को हरमू स्थित पार्टी के प्रधान कार्यालय में आयोजित मीडिया संबोधन में उन्होंने कहा कि झारखंड के खनिज संसाधनों का पहला लाभ उन्हीं क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मिलना चाहिए। इस दौरान पार्टी के केंद्रीय प्रमुख प्रवक्ता देवशरण भगत भी मौजूद रहे।
सुदेश महतो ने कहा कि झारखंड आंदोलन का मूल उद्देश्य जल, जंगल, जमीन और खनिज जैसे प्राकृतिक संसाधनों के जरिए यहां के लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना था। इसलिए खनिज क्षेत्रों के लोगों के हितों को सबसे अधिक प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि एमएमडीआर अधिनियम के मौजूदा प्रावधानों के कारण राज्य सरकार को मिनरल बेयरिंग लैंड पर स्वतंत्र रूप से सेस लगाने में अड़चन है। हालांकि, अधिनियम की धारा 9D में केंद्र सरकार को कुछ शर्तों और प्रतिबंधों के साथ राज्य को सेस लगाने की अनुमति देने का प्रावधान है। आजसू ने केंद्र से मांग की है कि खनिज क्षेत्रों के लोगों के लिए विशेष योजनाएं चलाने की शर्त पर झारखंड सरकार को सेस लगाने की अनुमति दी जाए।
सुदेश महतो ने स्पष्ट किया कि सेस से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल केवल खनिज क्षेत्रों के विकास और वहां रहने वाले लोगों के कल्याण पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों के स्कूलों में बच्चों को पोशाक, किताबें और छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई जाए। कुपोषित बच्चों और महिलाओं के लिए पौष्टिक आहार, बेहतर अस्पताल और हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने की व्यवस्था की जाए।
JMM पर भी साधा निशाना
आजसू अध्यक्ष ने झारखंड मुक्ति मोर्चा पर सेस के मुद्दे को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि झामुमो सेस का विरोध दूसरे कारणों से कर रही है। सुदेश महतो ने दावा किया कि राज्य में पुलिस के संरक्षण में अवैध खनन जारी है और सरकार वैध रूप से उत्पादित कोयले की कीमत बढ़ाकर काले बाजार में अवैध कमाई का रास्ता तैयार करना चाहती है।
उन्होंने कहा कि सेस लागू होने से पहले कोयला उत्पादन में वार्षिक वृद्धि करीब 8 प्रतिशत थी, जो सेस लगाने के बाद घटकर 2 प्रतिशत रह गई। उन्होंने इसे सरकारी तंत्र के संरक्षण में अवैध कोयला उत्पादन को बढ़ावा मिलने का संकेत बताया।
बजट खर्च को लेकर सरकार पर हमला
सुदेश महतो ने राज्य सरकार के बजट खर्च को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में सरकार अपने कुल बजट की करीब 25 प्रतिशत राशि खर्च नहीं कर सकी। उनके अनुसार ग्रामीण विकास विभाग ने अपने बजट का करीब 40 प्रतिशत, आदिवासी कल्याण विभाग ने 52 प्रतिशत, पेयजल विभाग ने 56 प्रतिशत और स्वास्थ्य विभाग ने 78 प्रतिशत राशि खर्च की।
उन्होंने सवाल किया कि जब सरकार के पास उपलब्ध बजट को खर्च करने की क्षमता ही नहीं है, तो राशि की कमी का हवाला क्यों दिया जा रहा है।
आजसू अध्यक्ष ने कहा, “कभी धन की कमी नहीं होती, कमी नीयत की होती है।” उन्होंने आरोप लगाया कि जिन विभागों में कथित कमीशनखोरी का बोलबाला है, वहां बजट खर्च अधिक हो रहा है।
उन्होंने झामुमो पर कथित घोटालों से ध्यान भटकाने के लिए आंदोलन और नाकेबंदी की राजनीति करने का आरोप भी लगाया।
संवाद और सहयोग के पक्ष में आजसू
सुदेश महतो ने कहा कि आजसू पार्टी खनिज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की बेहतरी के लिए संवाद और सहयोग के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि यदि झामुमो की नीयत साफ है तो राज्य सरकार को तथ्यों के साथ केंद्र सरकार के सामने अपना पक्ष रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आजसू डीएमएफटी के पैटर्न पर सेस लगाने के राज्य सरकार के अधिकार का समर्थन करती है, लेकिन यह सुनिश्चित होना चाहिए कि सेस से प्राप्त राशि का सीधा लाभ खनिज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मिले।








