आज भी जन-जन के जीवन में जीवंत है रामचरितमानस: संजय सर्राफ
रांची। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारतीय संत परंपरा और हिंदी साहित्य के महान स्तंभ गोस्वामी तुलसीदास की जयंती प्रत्येक वर्ष श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाती है।
गोस्वामी तुलसीदास केवल महान कवि ही नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त, संत और समाज को सदाचार, मर्यादा, सेवा तथा भक्ति का मार्ग दिखाने वाले युगद्रष्टा थे। उनका सबसे प्रसिद्ध ग्रंथ रामचरितमानस है, जिसके माध्यम से उन्होंने भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र, त्याग, सत्य, करुणा, कर्तव्य और मर्यादा को सरल लोकभाषा में जन-जन तक पहुंचाया।
तुलसीदास ने रामचरितमानस के अतिरिक्त विनय पत्रिका, गीतावली, दोहावली, कवितावली सहित अनेक महत्वपूर्ण रचनाएं कीं और उन्हें रामभक्ति की प्रमुख परंपरा के कवियों में माना जाता है। उनके जन्मस्थान और जन्म-वर्ष को लेकर विद्वानों में मतभेद मिलते हैं। राजापुर उत्तर प्रदेश को प्रमुख रूप से उनका जन्मस्थान माना जाता है।तुलसीदास जी के जीवन से जुड़ी प्रसिद्ध कथा के अनुसार उनका सांसारिक जीवन पत्नी रत्नावली के प्रति अत्यधिक अनुराग से जुड़ा था। रत्नावली के प्रेरक वचनों ने उनके भीतर वैराग्य और श्रीराम के प्रति अनन्य भक्ति की भावना को जागृत किया।
इसके बाद उनका संपूर्ण जीवन रामनाम, साधना और लोककल्याण को समर्पित हो गया। तुलसीदास जी की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन्होंनेआध्यात्मिक ज्ञान और रामकथा को ऐसी भाषा में प्रस्तुत किया,जिसे सामान्य जन सहजता से समझ सके। अवधी भाषा में रचित रामचरितमानस ने रामकथा को घर-घर पहुंचाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।
यही कारण है कि यह ग्रंथ आज भी धार्मिक आस्था के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, लोकभाषा और नैतिक जीवन-मूल्यों की महत्वपूर्ण धरोहर माना जाता है।तुलसीदास जयंती के अवसर पर मंदिरों और धार्मिक संस्थानों में रामचरितमानस का पाठ, रामनाम संकीर्तन, भजन-कीर्तन, सुंदरकांड पाठ, हनुमान चालीसा पाठ, पूजा-अर्चना तथा धार्मिक प्रवचन आयोजित किए जाते हैं। अनेक स्थानों पर तुलसीदास जी की रचनाओं और उनके जीवन-दर्शन पर विचार गोष्ठियां भी होती हैं।
तुलसीदास जयंती का उद्देश्य केवल एक महान संत-कवि की जयंती मनाना नहीं, बल्कि उनके द्वारा बताए गए सत्य, धर्म, मर्यादा, करुणा, सेवा, त्याग और भक्ति के आदर्शों को जीवन में उतारना है। श्रीराम के चरित्र के माध्यम से तुलसीदास जी ने समाज को यह संदेश दिया कि शक्ति का उपयोग लोककल्याण के लिए, ज्ञान का उपयोग सदाचार के लिए और जीवन का उपयोग मानव सेवा के लिए होना चाहिए।
आज के आधुनिक और बदलते सामाजिक परिवेश में तुलसीदास जी का साहित्य और अधिक प्रासंगिक दिखाई देता है। परिवार में प्रेम और संस्कार, समाज में सद्भाव, व्यक्ति के जीवन में संयम तथा कर्तव्य के प्रति निष्ठा जैसे मूल्यों की आवश्यकता आज भी उतनी ही है।इस प्रकार तुलसीदास जयंती भारतीय संस्कृति, भक्ति साहित्य और लोकमंगल की उस महान परंपरा का स्मरण पर्व है,
जिसने रामकथा को जन-जन तक पहुंचाकर भारतीय समाज के नैतिक और आध्यात्मिक जीवन को गहराई से प्रभावित किया। गोस्वामी तुलसीदास की वाणी आज भी यही प्रेरणा देती है कि भक्ति केवल पूजा नहीं, बल्कि सदाचार, सेवा, सत्य और मानवता के मार्ग पर चलने का नाम है।








