काबुल, अफगानिस्तान: अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के पश्चिमी हिस्से में एक निजी स्कूल के बाहर हुए ब्लास्ट में कई छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए। काबुल पुलिस के प्रवक्ता खालिद जदरान ने सोमवार रात घटना की पुष्टि की। ब्लास्ट के बाद पुलिस और संबंधित टीमें मौके पर पहुंचीं और मामले की जांच शुरू कर दी।स्थानीय मीडिया के मुताबिक, धमाका उस समय हुआ जब छात्र स्कूल की छुट्टी के बाद बाहर निकल रहे थे। घायलों में ज्यादातर लड़कियां शामिल हैं। एक चश्मदीद के अनुसार, करीब 30 घायलों को इलाज के लिए स्थानीय अस्पताल ले जाया गया है। हालांकि, अधिकारियों की ओर से अभी ब्लास्ट के कारण और जिम्मेदार लोगों को लेकर विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।
स्कूल के बाहर ब्लास्ट से मचा हड़कंप
घटना की जानकारी मिलते ही सुरक्षा और जांच से जुड़ी टीमें मौके पर पहुंच गईं। पुलिस ने क्षेत्र की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ब्लास्ट किस तरह के विस्फोटक से हुआ और इसके पीछे किसका हाथ था।अफगानिस्तान में इस तरह की घटनाओं के अलावा युद्ध के दौरान बचे विस्फोटक उपकरण भी आम लोगों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। खासकर बच्चों के इन उपकरणों की चपेट में आने की घटनाएं सामने आती रही हैं।
जून में विस्फोटक उपकरणों से बच्चों की मौत
इससे पहले जून में दक्षिणी अफगानिस्तान के हेलमंद प्रांत में युद्ध के समय के बचे दो विस्फोटक उपकरण फटने की घटनाओं में एक बच्चे की मौत हुई थी और छह अन्य घायल हुए थे। प्रांतीय सूचना और संस्कृति निदेशक मुल्ला अब्दुल बारी रशीद ने इसकी जानकारी दी थी। पहली घटना संगिन जिले में हुई थी। यहां तीन बच्चों को खिलौने जैसा एक सामान मिला था। बच्चों के उससे खेलने के दौरान वह फट गया, जिसमें एक बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई और दो अन्य घायल हुए। उसी दिन कुछ घंटे बाद इसी जिले में दूसरी घटना हुई, जिसमें चार बच्चे घायल हो गए।
युद्ध के अवशेष बने बच्चों के लिए खतरा
2 जून को पूर्वी अफगानिस्तान के गजनी प्रांत में भी युद्ध के समय का बचा हुआ एक विस्फोटक उपकरण फटने से एक किशोर गंभीर रूप से घायल हो गया था। प्रांतीय पुलिस कार्यालय के अनुसार, घटना गिलान जिले में हुई थी। एक लड़के को खिलौने जैसा सामान मिला था और उससे खेलने के दौरान विस्फोट हो गया। अफगानिस्तान दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां लंबे समय से चले आ रहे युद्ध और गृह संघर्ष के कारण बड़ी संख्या में बारूदी सुरंगें और बिना फटे विस्फोटक उपकरण मौजूद हैं। पिछले 40 साल से अधिक समय से जारी संघर्ष के अवशेष आज भी आम नागरिकों के लिए खतरा बने हुए हैं। इन घटनाओं में बच्चों के प्रभावित होने के मामले विशेष रूप से सामने आते रहे हैं।








