बिरसा मुंडा होटवार जेल में कैदियों को दी गई कानूनी जानकारी, डालसा ने चलाया जागरूकता अभियान

रांची : झारखंड राज्य कानूनी सेवाएं प्राधिकरण (झालसा) के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद के दिशा-निर्देश, न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा-1 के मार्गदर्शन और डालसा सचिव राकेश रौशन के नेतृत्व में ‘सशक्त युवा, सशक्त भारत’ अभियान के तहत बुधवार (12 अगस्त 2026) को बिरसा मुंडा

डालसा

रांची : झारखंड राज्य कानूनी सेवाएं प्राधिकरण (झालसा) के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद के दिशा-निर्देश, न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा-1 के मार्गदर्शन और डालसा सचिव राकेश रौशन के नेतृत्व में ‘सशक्त युवा, सशक्त भारत’ अभियान के तहत बुधवार (12 अगस्त 2026) को बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार, होटवार (रांची) में एक विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस जागरूकता कार्यक्रम में डिप्टी एलएडीसी (LADC) राजेश कुमार सिन्हा, सहायक एलएडीसी वीरेंद्र प्रताप, पीएलवी दीपक मुंडा, आरती कुमारी, भूप्रताप महतो सहित जेल के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे.

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18 से 25 वर्ष के बंदियों को सुधरने का मिलता है कानूनी मौका

कार्यक्रम के दौरान सहायक एलएडीसी वीरेंद्र प्रताप ने बंदियों को ‘अपराधी परिवीक्षा अधिनियम-1958’ (Probation of Offenders Act) के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि 18 से 25 वर्ष की आयु के ऐसे बंदी, जो पहली बार किसी छोटे-मोटे अपराध में शामिल हुए हैं, उन्हें यह कानून सुधरने का मौका प्रदान करता है.

उन्होंने अधिनियम की मुख्य धाराओं की जानकारी दी :

  • धारा 3: चेतावनी के बाद रिहाई की व्यवस्था.

  • धारा 4: अच्छे आचरण की परिवीक्षा (Probation) पर रिहाई.

  • धारा 5 एवं 6: मुआवजा, लागत और युवा बंदियों के विशेष संरक्षण के प्रावधान.

अधिकारियों ने पहली बार जेल आए युवाओं को भविष्य में अच्छे नागरिक बनने, शिक्षा जारी रखने और कौशल विकास (Skill Development) का प्रशिक्षण लेने की सलाह दी ताकि वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें.

मुफ्त कानूनी सहायता के लिए आवेदन करने की सलाह

डिप्टी एलएडीसी राजेश कुमार सिन्हा ने उपस्थित बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक किया. उन्होंने बताया कि बंदी अपने केस की अद्यतन स्थिति जानने के लिए जेल स्थित ‘लीगल एड क्लिनिक’ की सहायता ले सकते हैं. जिन बंदियों के पास अपना पक्ष रखने के लिए निजी अधिवक्ता (वकील) नहीं हैं, उन्हें नि:शुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए जेल पीएलवी (PLV) को तत्काल आवेदन तैयार करने के निर्देश दिए गए.

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