नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई करते हुए टोक्यो के रेंकोजी मंदिर से नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अस्थियां भारत वापस लाने का निर्देश देने संबंधी याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। शीर्ष अदालत नेताजी की बेटी अनीता बी. फाफ द्वारा दायर इस अर्जी पर विचार करने के लिए सहमत हो गई है।
सर्वोच्च अदालत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने इस मामले में अनीता बी. फाफ की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी (ए एम सिंघवी) ने अदालत से कहा कि नेताजी की बेटी अपने पिता की अस्थियों को पूरे सम्मान के साथ भारत वापस लाने की लगातार मांग कर रही हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता सिंघवी ने तर्क दिया कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि यदि नेताजी के प्रत्यक्ष वारिस अस्थियों को वापस लाना चाहते हैं, तो उन्हें स्वयं अदालत का दरवाजा खटखटाना होगा। इसी निर्देश का पालन करते हुए 84 वर्षीय अनीता बोस फाफ ने अब सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। संक्षिप्त दलीलें सुनने के बाद पीठ ने इस पर केंद्र सरकार से रुख स्पष्ट करने को कहा।
इससे पहले मार्च महीने में, सुप्रीम कोर्ट ने नेताजी के पोते आशीष रे की ऐसी ही एक याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। उस दौरान अदालत ने कहा था कि अगर नेताजी के कानूनी वारिस चाहते हैं कि उनकी अस्थियां देश में लाई जाएं, तो उन्हें खुद आगे आना होगा।
मार्च में हुई सुनवाई के दौरान सीजेआई ने स्पष्ट किया था कि अदालत नेताजी के सर्वोच्च बलिदान और उनके प्रति देश के सम्मान को भली-भांति समझती है। हालांकि, उचित कानूनी प्रक्रिया के लिए वारिस का सीधे अदालत के समक्ष उपस्थित होना आवश्यक था। इसके बाद याचिका वापस ले ली गई थी और अब उनकी बेटी ने स्वयं यह नई याचिका दाखिल की है, जिस पर केंद्र को नोटिस जारी किया गया है।




