तिरुमला : टीम इंडिया के स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या आंध्र प्रदेश के तिरुमला स्थित भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर के दर्शन करने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने अपनी गर्लफ्रेंड माहिका शर्मा के साथ विधिवत पूजा-अर्चना की और मंदिर में अपना सिर भी मुंडवाया। हार्दिक पंड्या के मुंडन के बाद तिरुपति में बाल दान की वर्षों पुरानी परंपरा एक बार फिर चर्चा में है। इससे पहले जाने-माने उद्योगपति मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी भी इस मंदिर में सिर मुंडवा चुके हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि तिरुपति आने वाले श्रद्धालु और कई चर्चित हस्तियां यहां बाल दान क्यों करती हैं।
तिरुपति में सिर मुंडवाने की क्या है परंपरा?
तिरुपति में सिर मुंडवाने और बाल दान करने की परंपरा वर्षों पुरानी बताई जाती है। यहां आने वाले श्रद्धालु पूरी आस्था के साथ अपने बाल दान करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बाल दान को ईश्वर के प्रति समर्पण, कृतज्ञता और विनम्रता का प्रतीक माना जाता है। कुछ श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद भगवान वेंकटेश्वर के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए बाल दान करते हैं। वहीं, कई लोग किसी विशेष संकल्प के तहत भी तिरुपति में अपना सिर मुंडवाते हैं। मान्यता है कि बाल दान के माध्यम से व्यक्ति अपने अहंकार और सांसारिक मोह का त्याग कर भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करता है। हालांकि, यह परंपरा धार्मिक आस्था और मान्यताओं पर आधारित है।
बाल दान से जुड़ी पौराणिक कथा
तिरुपति में बाल दान करने के पीछे एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान वेंकटेश्वर का पद्मावती से विवाह हुआ, तब एक परंपरा के तहत उन्हें विवाह से पहले कन्या पक्ष को एक विशेष प्रकार का शुल्क देना था। कथा के अनुसार, भगवान वेंकटेश्वर उस समय यह शुल्क चुकाने में असमर्थ थे। इसके बाद उन्होंने कुबेर महाराज से ऋण लेकर पद्मावती से विवाह किया और कलयुग के अंत तक पूरा ऋण चुकाने का वचन दिया।
मान्यता के अनुसार, भगवान वेंकटेश्वर ने देवी लक्ष्मी की ओर से यह भी कहा कि जो भक्त इस ऋण को चुकाने में उनकी सहायता करेंगे, उन्हें मां लक्ष्मी दस गुना अधिक धन प्रदान करेंगी। इसी धार्मिक मान्यता के कारण कई श्रद्धालु तिरुपति में बाल दान को भगवान विष्णु के ऋण को चुकाने में सहयोग के रूप में देखते हैं।
कौन हैं भगवान वेंकटेश्वर?
आंध्र प्रदेश में स्थित तिरुमला तिरुपति बालाजी मंदिर देश के प्रमुख और प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों में शामिल है। तिरुमला की पहाड़ियों पर स्थित इस भव्य मंदिर में हर समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले भक्त यहां भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन और पूजा-अर्चना करते हैं। भगवान वेंकटेश्वर को बालाजी और श्रीनिवास के नाम से भी जाना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान वेंकटेश्वर भगवान विष्णु के अवतार हैं। श्रद्धापूर्वक उनके दर्शन और पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के पापों का प्रायश्चित होता है। यह भी मान्यता है कि इसी स्थान पर भगवान विष्णु ने मानव जाति के कल्याण के लिए वेंकटेश्वर का अवतार धारण किया था।




