रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली की जांच आगे बढ़ने के साथ नए तथ्य सामने आ रहे हैं। अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने गुरुवार को हजारीबाग पुलिस की मदद से एक और अभ्यर्थी सुमन सौरभ को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। आरोप है कि सुमन सौरभ ने झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा-2025, विज्ञापन संख्या-01/2026 की प्रारंभिक परीक्षा में अनुचित माध्यमों का इस्तेमाल कर सफलता हासिल की थी। CID के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपी ने अनुचित तरीके से परीक्षा उत्तीर्ण करने की बात स्वीकार की है। इस गिरफ्तारी के साथ मामले में अब तक गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 11 हो गई है। यह कार्रवाई CID थाना कांड संख्या-16/2026 के तहत की गई है।
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TDPL कार्यालय से मिले डिजिटल साक्ष्य और OMR शीट
गिरफ्तारी के समय सुमन सौरभ के पास से ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी बरामद नहीं हुई। हालांकि, CID का कहना है कि पूछताछ में उसने अनुचित तरीके से परीक्षा पास करने की बात स्वीकार की है। सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसी टीडीपीएल के कार्यालय से महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं। एजेंसी के दफ्तर से जब्त कंप्यूटर की फोरेंसिक जांच में JPSC पीटी परीक्षा के प्रश्न और उत्तर पहले से स्टोर होने की जानकारी सामने आई है। जांच के दौरान टीडीपीएल कार्यालय से ओएमआर शीट भी मिलने की बात कही गई है। जांच एजेंसी इन साक्ष्यों के आधार पर परीक्षा प्रक्रिया में कथित रूप से सुनियोजित तरीके से की गई सेटिंग और अनियमितताओं के पहलुओं की जांच कर रही है।
आठ आरोपियों से छठे दिन भी पूछताछ
CID मुख्यालय में गुरुवार को लगातार छठे दिन आठ आरोपियों से पूछताछ की गई। इनमें JPSC की तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक रामबीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर मनोज तिवारी उर्फ अभय तिवारी, तकनीकी प्रोग्रामर मो. उस्मान और मो. एबाद शामिल हैं। इसके अलावा टीडीपीएल के कर्मी हेमंत वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह और संजय कुमार से भी पूछताछ की गई। बुधवार को रिमांड पर लिए गए तीन अन्य आरोपियों से भी आमने-सामने बैठाकर सवाल-जवाब किए गए। जांच एजेंसी डिजिटल साक्ष्यों का मिलान आरोपियों के बयानों से कर रही है। मामले से जुड़े तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।
पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते से तीसरी बार पूछताछ
आरोपियों के बयान और टीडीपीएल के कंप्यूटर से मिले डिजिटल साक्ष्यों के बाद जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते की मुश्किलें बढ़ने की बात कही जा रही है। CID के अनुसार, पूछताछ के दौरान डेटा टेंपरिंग, ओएमआर शीट में कथित हेराफेरी और अन्य अनियमितताओं से संबंधित कई जानकारियां सामने आई हैं। उनका पासपोर्ट भी जब्त कर विदेश यात्राओं का ब्योरा खंगाला जा रहा है। शुक्रवार को एल. ख्यांग्ते को तीसरी बार पूछताछ के लिए तलब किया गया है। जांच के आगे बढ़ने के साथ उनकी गिरफ्तारी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
JPSC में खत्म हुई ‘मेंबर-इन-चार्ज’ व्यवस्था
इस बीच, जेपीएससी की कार्यप्रणाली में एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। आयोग में लंबे समय से चली आ रही ‘मेंबर-इन-चार्ज’ व्यवस्था को लगभग समाप्त कर दिया गया है। पहले किसी सरकारी विभाग से नियुक्ति के लिए अधियाचना मिलने के बाद संबंधित भर्ती की जिम्मेदारी आयोग के एक सदस्य को सौंपी जाती थी। वह सदस्य उस भर्ती का प्रभारी बनकर पूरी प्रक्रिया की निगरानी करता था और समय-समय पर आयोग को प्रगति की जानकारी देता था।
आयोग के सूत्रों के अनुसार, अब नई भर्तियों के लिए अलग-अलग सदस्यों को जिम्मेदारी नहीं दी जा रही है। नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े अधिकांश प्रशासनिक और तकनीकी कार्य अब केंद्रीकृत तरीके से संचालित किए जा रहे हैं। पहले प्रभारी सदस्य विभाग से समन्वय, नियमों की समीक्षा, परीक्षा कार्यक्रम तैयार करने, आयोग की बैठकों में संबंधित विषय रखने और आवश्यक निर्णयों के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी निभाता था।
अब नई भर्ती के लिए अलग से किसी सदस्य को नामित नहीं किया जा रहा है। भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अधिकांश निर्णय आयोग स्तर पर केंद्रीकृत तरीके से लिए जा रहे हैं। इस बदलाव के बाद आयोग के भीतर कार्यों के बंटवारे, जवाबदेही और निर्णय प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।



