रांची : झारखंड की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच तेज हो गई है। 14वीं JPSC पीटी परीक्षा से जुड़े मामले में सीआईडी के समन पर झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते मंगलवार को CID मुख्यालय पहुंचे। यहां जांच एजेंसी उनसे परीक्षा संचालन, टेंडर आवंटन और कथित अनियमितताओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर पूछताछ कर रही है।
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CID इससे पहले इस मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों से लगातार पूछताछ कर चुकी है। इनमें JPSC की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, परीक्षा एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के निदेशक रामवीर सिंह, अभय कुमार तिवारी, उस्मान और एबाद शामिल हैं। जांच के दौरान मिले इनपुट के आधार पर ही पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते को समन जारी किया गया।
टेंडर प्रक्रिया और परीक्षा संचालन पर सवाल
CID की जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि टीडीपीएल को परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी किन परिस्थितियों में सौंपी गई। जांच एजेंसी यह भी जानना चाहती है कि यदि एजेंसी के ब्लैकलिस्ट होने की जानकारी थी, तो उसे JPSC जैसी संवैधानिक चयन संस्था की परीक्षा का टेंडर कैसे मिला। इसके अलावा परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी, ओएमआर शीट में कथित हेराफेरी रोकने के लिए उठाए गए कदम और शिकायतों के निस्तारण को लेकर भी पूर्व अध्यक्ष से जवाब मांगा जा रहा है। जांच एजेंसी यह भी स्पष्ट करना चाहती है कि इन कथित अनियमितताओं में किसी स्तर पर प्रशासनिक चूक हुई या नहीं।
एल ख्यांग्ते ने आरोपों से किया इनकार
पूछताछ से एक दिन पहले एल ख्यांग्ते ने मीडिया से बातचीत में किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया था। उनका कहना था कि अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने सभी निर्णय निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के तहत लिए। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने आयोग की जिम्मेदारी संभाली थी, तब कई परीक्षाओं के परिणाम लंबित थे और आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता थी। उनके अनुसार, लंबित परिणाम जारी कराए गए, नई परीक्षाएं आयोजित कराई गईं और शिक्षकों की प्रोन्नति जैसी प्रक्रियाओं को भी आगे बढ़ाया गया। 40 लाख रुपये में सीट बिकने के आरोपों पर एल ख्यांग्ते ने कहा कि ऐसी बातें उनके संज्ञान में भी आई हैं। यदि इन आरोपों में जरा भी सच्चाई है, तो जांच एजेंसी को मामले की गहराई से जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।




