नई दिल्ली : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने PM मोदी को अपना इस्तीफा भेज दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से इसकी जानकारी दी और अपने इस्तीफे की वजह भी सार्वजनिक की। NEET-UG परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं को लेकर देशभर में जारी विवाद और जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच उन्होंने यह निर्णय लिया। अपने इस्तीफे के साथ जारी पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वह पिछले चार दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं। उनका हमेशा यह विश्वास रहा है कि मजबूत, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की आकांक्षाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का वह हमेशा सम्मान करते रहे हैं।
— Dharmendra Pradhan (@dpradhanbjp) July 25, 2026
NEET-UG परीक्षा और सरकार की कार्रवाई
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में लिखा कि 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में अनियमितताएं सामने आई थीं। इसके बाद भारत सरकार ने मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी। साथ ही परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया और अगले वर्ष से परीक्षा को कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) मोड में आयोजित करने का फैसला भी किया गया। उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा को सुचारू रूप से संपन्न कराना रही। इसके लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और जिला प्रशासन ने मिलकर काम किया। छात्रों, अभिभावकों और संबंधित सभी पक्षों के सहयोग से 21 जून 2026 को परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने शुरुआत से ही इस मामले की जिम्मेदारी ली और कभी इससे पीछे नहीं हटे। उनका संकल्प था कि किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य परीक्षा माफिया की वजह से प्रभावित न हो और किसी भी विद्यार्थी के साथ अन्याय न होने दिया जाए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 16 जुलाई को घोषित NEET-UG परिणाम संतोषजनक रहे, जिनमें गरीब पृष्ठभूमि से आने वाले कई प्रतिभाशाली छात्रों ने सफलता हासिल की।
इस्तीफे में युवाओं और लोकतंत्र का किया उल्लेख
अपने पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को गुमराह करने और बाधाएं उत्पन्न करने का प्रयास किया, जिससे उन्हें गहरा दुख पहुंचा। उन्होंने कहा कि वह लोकतंत्र की शक्ति और युवाओं की आकांक्षाओं में हमेशा विश्वास रखते हैं। उन्होंने लिखा कि पिछले 10 दिनों की घटनाओं ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से व्यथित किया है, लेकिन यह उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है। उनके अनुसार भारत की युवाशक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है और उसे भ्रम की स्थिति में नहीं पड़ने देना चाहिए।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जंतर-मंतर और देशभर में बनी परिस्थितियों का राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ न उठा सकें, देश की एकता बनी रहे और किसी भी छात्र का भविष्य कानूनी उलझनों में न फंसे, इसी उद्देश्य से उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र भेजने का निर्णय लिया। पत्र के अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, विश्वास और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों का भी धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र सेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी और वह भविष्य में भी भारत माता, ओडिशा की जनता तथा देश के युवाओं की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए समर्पित रहेंगे।




