भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष सह पूर्व सांसद गीता कोड़ा ने आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता निशा भगत की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु के मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा संज्ञान लिए जाने का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय महिला आयोग की यह पहल पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
श्रीमती कोड़ा ने कहा कि निशा भगत ने अपनी मृत्यु से पूर्व सोशल मीडिया लाइव के माध्यम से ऑनलाइन ट्रोलिंग, उत्पीड़न तथा स्थानीय प्रशासन और पुलिस से जुड़ी शिकायतों को सार्वजनिक किया था। उन्होंने लाइव के दौरान पिठौरिया थाना प्रभारी से भी संपर्क कर अपनी परेशानी और जीवन समाप्त करने जैसे विचारों का भी जिक्र किया था। ऐसे में इस पूरे मामले की निष्पक्ष, विस्तृत और समयबद्ध जांच बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर द्वारा संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर सात दिनों के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) मांगना सराहनीय है। आयोग ने पुलिस की कार्रवाई, पूर्व में दर्ज शिकायतों पर हुई कार्रवाई तथा फेसबुक लाइव, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का निर्देश देकर मामले की गंभीरता को समझा है।
प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि इस मामले में पुलिस-प्रशासन एवं अन्य की ओर से किसी भी स्तर पर लापरवाही अथवा कर्तव्य में चूक हुई है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। साथ ही दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि झारखंड में महिलाओं और आदिवासी समाज की बेटियों की सुरक्षा केवल सरकारी दावों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। किसी भी महिला की पीड़ा और मदद की पुकार को अनसुना करना बेहद गंभीर विषय है। निशा भगत के परिजनों को न्याय और आवश्यक सहायता मिलनी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि राष्ट्रीय महिला आयोग की पहल से मामले की सच्चाई सामने आएगी और पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा।
इस निर्णय का समीर उरांव, सुनील सोरेन, आशा लकड़ा, सुदर्शन भगत, शिव शंकर उरांव, रामकुमार पाहन, सन्नी टोप्पो, अशोक बड़ाईक, कोचे मुंडा, अनीता मुर्मू, रोशनी खलखो, सहित अन्य ने भी स्वागत किया है।
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