रांची: केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने कांग्रेस सहित विपक्षी दलों पर विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देशभर में झूठ, भ्रम और अफवाह फैलाने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला। भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि कांग्रेस, राहुल गांधी और पूरे विपक्ष का असली चेहरा जनता के सामने बेनकाब होना जरूरी है। विपक्ष बिना किसी प्रमाण के चुनाव आयोग, चुनावी प्रक्रिया और भारतीय लोकतंत्र को मजबूत एवं सजीव बनाए रखने वाली संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल खड़े कर रहा है। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का एक सुनियोजित प्रयास है।
कांग्रेस, राहुल गांधी, टीएमसी, लेफ्ट और झामुमो जैसी पार्टियां मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करने में जुटी हैं
डॉ. मजूमदार ने कहा कि कांग्रेस, राहुल गांधी, टीएमसी, लेफ्ट और झामुमो जैसी पार्टियां मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करने में जुटी हैं, जिससे देश की संवैधानिक व्यवस्था पर जनता का विश्वास कमजोर हो। विपक्ष हिटलर और उनके मंत्री गोएबल्स के मंत्र को अपनाकर लगातार झूठ को सच साबित करने की असफल कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि पहले कांग्रेस चुनाव हारने पर ईवीएम को दोष देती थी, अब उसे SIR के रूप में नया बहाना मिल गया है। यह कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है कि ‘नाच न जाने आंगन टेढ़ा’। वर्ष 2014 से 2025 तक कांग्रेस 56 बार चुनाव हार चुकी है। शायद कांग्रेस भारतीय फिल्म ‘अब तक 56’ से प्रेरित होकर हार का नया रिकॉर्ड बनाने में जुटी है।
विदेश घूमने से नहीं, जनता का दिल जीतने से मिलती है चुनाव में सफलता
केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि आंदोलन को बीच में छोड़कर विदेश घूमने से चुनाव नहीं जीते जा सकते। चुनाव जीतने के लिए जनता का विश्वास और दिल जीतना पड़ता है। कांग्रेस दशकों से कई राज्यों में सत्ता से बाहर है। लगातार मिल रही चुनावी पराजय से उपजी हताशा में वह चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया पर दोषारोपण कर रही है। उन्होंने कहा कि 2024 से पहले जब SIR नहीं हो रहा था, तब कांग्रेस चुनाव क्यों हार रही थी? विपक्ष को अपनी नीतियों और नेतृत्व की समीक्षा करनी चाहिए, न कि संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा करना चाहिए।
देश में 12वीं बार हो रही SIR की प्रक्रिया, विपक्ष कर रहा पाखंड
डॉ. मजूमदार ने कहा कि SIR देश में पहली बार नहीं हो रहा है, बल्कि यह प्रक्रिया 12वीं बार हो रही है। कांग्रेस इस मुद्दे पर पूरी तरह पाखंड कर रही है। 10 बार तो यह प्रक्रिया कांग्रेस के शासन में ही हो चुकी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल भी पूर्व में मतदाता सूची से नाम हटने को नियमित प्रक्रिया बता चुके हैं। इसके बावजूद कांग्रेस जनता को गुमराह करने में जुटी है। विपक्ष 13 करोड़ नाम हटाए जाने का मुद्दा उठा रहा है, लेकिन इसकी वास्तविकता जनता से छिपा रहा है। इन आंकड़ों के अनुसार, लगभग 2.8 करोड़ मृत मतदाता, 6.3 करोड़ दूसरे स्थानों पर जाकर बस चुके मतदाता और करीब एक करोड़ डुप्लीकेट नाम शामिल हैं। विपक्ष केवल 13 करोड़ का आंकड़ा बताकर भ्रम फैला रहा है, जबकि नाम हटने के वास्तविक कारणों पर चुप्पी साधे हुए है।
उन्होंने कहा कि लगभग 2.8 करोड़ मृत मतदाताओं को छोड़कर आयोग की ओर से अन्य सभी संबंधित मतदाताओं को नोटिस भेजे गए हैं। बीएलओ तीन-तीन बार घर जाकर मतदाताओं के नाम और विवरण की पुष्टि कर चुके हैं। इस पूरी प्रक्रिया में भाजपा, कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दलों के करीब 20 लाख बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) भी बीएलओ के साथ जुड़े रहे, लेकिन विपक्ष की ओर से किसी गड़बड़ी का प्रमाण सामने नहीं आया।
वोट चोरी की फीलिंग आ रही है’, राहुल गांधी का बयान बचकाना और शर्मनाक
केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब मीडिया उनसे पूछती है कि वोट चोरी कैसे हुई, तो उनका जवाब होता है कि उन्हें ऐसी फीलिंग आ रही है। देश के इतने बड़े विपक्षी नेता का इस तरह का बचकाना बयान बेहद शर्मनाक है। विपक्ष केवल आरोप लगा रहा है, लेकिन आज तक एक भी ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी गया, लेकिन वहां भी उसे निराशा हाथ लगी।
डॉ. मजूमदार ने विपक्षी नेताओं को संविधान पढ़ने की नसीहत देते हुए कहा कि राहुल गांधी जिन सवालों को लेकर SIR पर सवाल उठा रहे हैं, उन सभी का जवाब भारतीय संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों में मौजूद है। मतदाता कौन बन सकता है, मतदाता सूची का पुनरीक्षण क्यों होता है और चुनाव आयोग के अधिकार क्या हैं, इन सभी विषयों का संवैधानिक प्रावधानों में स्पष्ट उल्लेख है। यह संविधान भाजपा ने नहीं, बल्कि कांग्रेस के शासनकाल में ही बनाया गया था। इसलिए कांग्रेस को पहले संविधान को समझना चाहिए और फिर संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना चाहिए।
दिल्ली में अराजकता फैलाकर लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश
केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री ने आरोप लगाया कि संवैधानिक और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से सफलता नहीं मिलने पर विपक्ष ने ध्रुव राठी जैसे लोगों को आगे कर दिल्ली में हंगामा और अराजकता का माहौल बनाया। उन्होंने 20 जुलाई को हुए हंगामे का उल्लेख करते हुए कहा कि इस दौरान 118 पुलिसकर्मी बुरी तरह घायल हुए। महिलाओं और बीएलओ पर भी हमले किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के सहयोगी दलों और नेताओं का उद्देश्य लोकतांत्रिक व्यवस्था को अस्थिर करना है।
उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन सड़कों पर अराजकता फैलाने से नहीं होता। भारत में सत्ता परिवर्तन का रास्ता लोकतांत्रिक और चुनावी प्रक्रिया से होकर गुजरता है। यदि विपक्ष को सत्ता में आना है तो उसे अपनी नीतियों, नेतृत्व और कार्यों के आधार पर जनता के बीच जाना होगा। जनता का विश्वास हासिल होगा, तभी सरकार बनाने का अवसर मिलेगा।
2029 में भी जनता विपक्ष को देगी जवाब, फिर बनेगी भाजपा की सरकार
डॉ. मजूमदार ने विश्वास जताया कि वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस सहित विपक्षी दलों को जनता निराश करेगी और भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में फिर से सरकार बनेगी। उन्होंने मीडिया से आग्रह किया कि विपक्ष द्वारा लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बदनाम करने और संवैधानिक संस्थाओं पर अविश्वास पैदा करने के प्रयासों की वास्तविकता जनता तक पहुंचाई जाए।
उन्होंने कहा कि विपक्ष चाहता है कि देश की जनता का विश्वास चुनावी प्रक्रिया और लोकतंत्र से उठ जाए। यह देश के लोकतांत्रिक भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। इसलिए आज आवश्यकता है कि अराजकता को हटाया जाए और लोकतंत्र को बचाया जाए।
प्रेस वार्ता में भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बालमुकुंद सहाय, प्रदेश मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव एवं प्रदेश मीडिया प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह उपस्थित थे।



