धनबाद: शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितता, भ्रष्टाचार और शिक्षकों की मनमानी ट्रांसफर-पोस्टिंग के खिलाफ निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने आज मंगलवार से धनबाद उपायुक्त कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। जहां विधायक ने शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि जिले में शिक्षकों के स्थानांतरण और पदस्थापन में नियमों की अनदेखी के साथ बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है। उनकी इस भूख हड़ताल को समर्थन देने पूर्व विधायक आनंद महतो भी पहुंचे।
लड़ाई सरकार के खिलाफ नहीं बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में व्याप्त खामियों के खिलाफ है
भूख हड़ताल पर बैठे विधायक अरूप चटर्जी ने कहा कि उनकी लड़ाई सरकार के खिलाफ नहीं बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में व्याप्त खामियों के खिलाफ है। उन्होंने कहा, सरकार ने शिक्षकों की नियुक्ति की है। लेकिन उन्हें जरूरत के मुताबिक, स्कूलों में पदस्थापित नहीं किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि गांवों में बच्चों की संख्या अधिक है, इसके बावजूद छात्र-शिक्षक अनुपात के अनुसार शिक्षकों की तैनाती नहीं हो रही। नतीजतन ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे पर्याप्त शिक्षकों के अभाव में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित हो रहे हैं।
विधायक ने कहा कि पिछले एक वर्ष में करीब 1500 शिक्षकों का स्थानांतरण और पदस्थापन किया गया
उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग में नियमावली और छात्र-शिक्षक अनुपात को दरकिनार कर मनमाने तरीके से ट्रांसफर-पोस्टिंग की जा रही है। इस पूरी प्रक्रिया में कथित तौर पर पैसे का लेन-देन हो रहा है। विधायक ने कहा कि पिछले एक वर्ष में करीब 1500 शिक्षकों का स्थानांतरण और पदस्थापन किया गया. जिनमें अधिकांश को शहरी क्षेत्रों में तैनात किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब ग्रामीण स्कूलों में शिक्षकों की जरूरत है तो वहां की अनदेखी कर शहरों में शिक्षकों की तैनाती क्यों की जा रही है।
विधायक ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि आरटीई के तहत गरीब बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं का लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच रहा है, जबकि संपन्न परिवारों के बच्चों को इसका लाभ दिया जा रहा है. गरीब बच्चों को उनके अधिकारों से वंचित रखना शिक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता है।
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यही नहीं अरूप चटर्जी ने जिला प्रशासन को निशाने पर लेते हुए कहा कि शिक्षा विभाग की इन अनियमितताओं पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। जब तक व्यवस्था में सुधार शिक्षकों की जरूरत के अनुसार, पदस्थापना और कथित भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की दिशा में ठोस पहल नहीं होती तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह भूख हड़ताल किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मनमानी के खिलाफ है।
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