IDBI बैंक के निजीकरण के खिलाफ कर्मचारियों का प्रदर्शन

जमशेदपुर: जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित IDBI बैंक परिसर में प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों का धरना-प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहा। आंदोलन में महिला और पुरुष कर्मचारियों के साथ दूसरे दिन उनके परिवार के सदस्य भी शामिल हुए। परिजनों ने धरना स्थल पर पहुंचकर

कर्मचारियों का प्रदर्शन

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जमशेदपुर: जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित IDBI बैंक परिसर में प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों का धरना-प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहा। आंदोलन में महिला और पुरुष कर्मचारियों के साथ दूसरे दिन उनके परिवार के सदस्य भी शामिल हुए। परिजनों ने धरना स्थल पर पहुंचकर कर्मचारियों की मांगों का समर्थन किया और केंद्र सरकार से प्रस्तावित विनिवेश पर पुनर्विचार करने की अपील की।

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परिजनों ने कहा कि बैंक के निजीकरण की स्थिति में कर्मचारियों और उनके परिवारों के सामने कई तरह की चुनौतियां आ सकती हैं। उन्होंने नौकरी की सुरक्षा, वेतन, पेंशन, सेवा शर्तों और बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता जताई।
धरना दे रहे कर्मचारियों का कहना है कि IDBI बैंक को घाटे की स्थिति से निकालकर मुनाफे तक पहुंचाने में अधिकारियों और कर्मचारियों ने वर्षों तक मेहनत की है। ऐसे में सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की हिस्सेदारी निजी निवेशक Fairfax को बेचने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
कर्मचारियों ने बैंक में सार्वजनिक नियंत्रण बनाए रखने की मांग करते हुए कहा कि सरकार और LIC की संयुक्त हिस्सेदारी कम से कम 51 प्रतिशत सुरक्षित रहनी चाहिए। उनका मानना है कि बैंक को मजबूत बनाने के लिए निजीकरण ही एकमात्र विकल्प नहीं है।
धरने के दौरान तपन मुर्मू, राकेश मल्होत्रा, अमित कुमार, प्रभात कंसवार और प्रभात कुमार समेत बैंक अधिकारियों ने अपनी बातें रखीं। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन केवल नौकरी की सुरक्षा तक सीमित नहीं है।
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