रामलीला मैदान के भाषण पर भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री एवं राज्यसभा सांसद का तीखा पलटवार, कहा—2025-26 के आंकड़ों से 2024 का चुनाव अवैध बताना तर्कहीन, राजनीतिक मंच से जेल भेजने की धमकी देना संवैधानिक मर्यादाओं का अपमान
रांची: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मंत्री, उत्तर प्रदेश के सह-प्रभारी एवं राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने नई दिल्ली के रामलीला मैदान में राहुल गांधी के भाषण पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक विफलताओं का ठीकरा संवैधानिक संस्थाओं पर फोड़ने की कोशिश कर रही है। ‘वोट चोरी’ के नाम पर निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर आरोप लगाकर जनता में अविश्वास पैदा करना गैर-जिम्मेदाराना राजनीति है।
डॉ. वर्मा ने कहा कि राहुल गांधी 2025-26 के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में चिह्नित लगभग 13.39 करोड़ मतदाता प्रविष्टियों के आधार पर 2024 के लोकसभा चुनाव को अवैध बता रहे हैं। इनमें मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित और दोहरे पंजीकरण की प्रविष्टियां भी शामिल हैं। बाद में हुए पुनरीक्षण के आंकड़े अपने आप में पिछले चुनाव में ‘वोट चोरी’ का प्रमाण कैसे हो गए? यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया गया है तो कांग्रेस बूथवार साक्ष्य प्रस्तुत करे। सर्वोच्च न्यायालय भी 27 मई 2026 को बिहार में SIR की वैधानिकता स्वीकार कर चुका है।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को आरोप लगाने से पहले आधिकारिक रिकॉर्ड पढ़ना चाहिए। 2024 के लोकसभा चुनाव में राजीव कुमार मुख्य निर्वाचन आयुक्त थे, जबकि ज्ञानेश कुमार ने 15 मार्च 2024 को चुनाव आयुक्त का पदभार संभाला था। वह 19 फरवरी 2025 को मुख्य निर्वाचन आयुक्त बने। ऐसे में ज्ञानेश कुमार के बिना नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं बन सकते थे, जैसे राहुल गांधी के आरोप पूरी तरह से बेतुके हैं।
किसी व्यक्ति को अपराधी घोषित करने और दंड देने का अधिकार न्यायपालिका को है
ज्ञानेश कुमार को जेल भेजने की घोषणा पर डॉ. वर्मा ने कहा कि राहुल गांधी एक ओर ‘मोहब्बत की दुकान’ की बात करते हैं, दूसरी ओर संवैधानिक पदाधिकारी को बिना दोषसिद्धि जेल भेजने की घोषणा करते हैं। किसी व्यक्ति को अपराधी घोषित करने और दंड देने का अधिकार न्यायपालिका को है, रामलीला मैदान की भीड़ को नहीं। देश की न्यायपालिका, निर्वाचन आयोग और अन्य संस्थाओं पर कब्जे के आरोप भी गंभीर, निराधार और जनता को भ्रमित करने वाले हैं। डॉ. वर्मा ने कहा कि 1 नवंबर की तारीख का चयन करना सिखों की भावनाओं का अपमान है। दीपावली के पावन अवसर पर रविवार के दिन इस कार्यक्रम का आयोजन, व्यापारियों के प्रति उनकी विरोधी मानसिकता को साफ तौर पर दर्शाता है।
जिस कांग्रेस के शासन में संविधान और नागरिक स्वतंत्रताओं पर आपातकाल का प्रहार हुआ, वह आज लोकतंत्र के संरक्षक बनने का ढोंग कर रही है।
कांग्रेस को इतिहास याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि 12 जून 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का निर्वाचन निरस्त किया था और मात्र 13 दिन बाद देश में आपातकाल लागू कर दिया गया। विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारियां, प्रेस सेंसरशिप और नागरिक अधिकारों का दमन कांग्रेस के इतिहास से मिटाया नहीं जा सकता। जिस कांग्रेस के शासन में संविधान और नागरिक स्वतंत्रताओं पर आपातकाल का प्रहार हुआ, वह आज लोकतंत्र के संरक्षक बनने का ढोंग कर रही है। संविधान किसी परिवार की जागीर नहीं है। देश को राजनीतिक धमकियां देना बंद करे। डॉ. वर्मा ने राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री और गृह मंत्री अमित शाह पर की गई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें संवैधानिक मर्यादाओं के दायरे में रहकर ही राजनीतिक बयानबाजी करनी चाहिए।
also read : सीएमपीएफओ को 727 करोड़ का नुकसान, सीबीआई ने दर्ज की प्राथमिकी



