जनविरोधी फैसला तत्काल वापस ले सरकार, गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के घर-जमीन का सपना न छीने
रांची: भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता संदीप वर्मा ने झारखंड सरकार की कैबिनेट द्वारा भूमि एवं भवन की रजिस्ट्री पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत सरचार्ज लगाने के निर्णय की कड़ी आलोचना करते हुए इसे जनविरोधी और आम जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने वाला फैसला बताया। उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार का यह निर्णय राज्य के गरीब, मध्यमवर्गीय और नौकरीपेशा परिवारों के लिए अपने घर और जमीन का सपना पूरा करना और भी कठिन बना देगा।
संदीप वर्मा ने कहा कि झारखंड में पहले से ही जमीन की खरीद-बिक्री, रजिस्ट्री और म्यूटेशन की प्रक्रिया में आम लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सरकारी कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनावश्यक प्रक्रियाओं से जनता त्रस्त है। ऐसी स्थिति में रजिस्ट्री की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और किफायती बनाने के बजाय अतिरिक्त सरचार्ज लगाना सरकार की जनविरोधी सोच को उजागर करता है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का दायित्व जनता को राहत देना और आम नागरिकों के जीवन को आसान बनाना है, न कि नए-नए शुल्क लगाकर उनकी आर्थिक परेशानियां बढ़ाना। राजस्व बढ़ाने के नाम पर जनता पर अतिरिक्त बोझ डालना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। सरकार को यह समझना चाहिए कि जमीन और मकान केवल संपत्ति नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के जीवनभर की मेहनत, बचत और भविष्य की सुरक्षा का आधार हैं।
श्री वर्मा ने कहा कि झारखंड की जनता आज पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के उस निर्णय को भी याद कर रही है, जिसके तहत महिलाओं के नाम पर मात्र एक रुपये में भूमि एवं भवन की रजिस्ट्री का प्रावधान किया गया था। इस व्यवस्था का उद्देश्य महिलाओं को संपत्ति का अधिकार देकर उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना था। लेकिन हेमंत सरकार ने सत्ता में आने के बाद इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया। अब रजिस्ट्री पर अतिरिक्त सरचार्ज लगाने का निर्णय महिलाओं के सशक्तिकरण और आम जनता को राहत देने के सरकार के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
संदीप वर्मा ने कहा कि एक ओर सरकार महिला सशक्तिकरण और जनकल्याण की बातें करती है, वहीं दूसरी ओर ऐसे फैसले लेती है, जिनका सीधा असर आम परिवारों की जेब पर पड़ता है। सरकार की कथनी और करनी में यह अंतर जनता के प्रति उसकी संवेदनहीनता को दर्शाता है।
श्री वर्मा ने झारखंड सरकार से मांग की कि भूमि एवं भवन की रजिस्ट्री पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त सरचार्ज लगाने के निर्णय को अविलंब वापस लिया जाए। साथ ही रजिस्ट्री और म्यूटेशन की प्रक्रिया को भ्रष्टाचारमुक्त, पारदर्शी और सरल बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि राज्य के नागरिकों को राहत मिल सके और उनके अपने घर-जमीन के सपने पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।



