रांची: नाबालिग को जेल में रखने पर मुआवजा की मांग वाली अनीता देवी की याचिका की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में हुई। मामले में कोर्ट के आदेश के आलोक में मुख्य सचिव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुए।
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की कोर्ट ने मुख्य सचिव से कहा कि सरकार के अधिवक्ता कोर्ट में सही ढंग से इस मामले में अपना पक्ष नहीं रख रहे हैं। सरकार के अधिवक्ता और सरकार के बीच समन्वय का अभाव है, जिस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
मुख्य सचिव ने कोर्ट की बातों पर अमल कर इसे ठीक करने का आश्वासन दिया। इसके बाद कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर निर्धारित की। साथ ही कोर्ट ने अगली सुनवाई में मुख्य सचिव को कोर्ट में उपस्थित रहने से छूट प्रदान की।
दरअसल यह मामला रांची सदर थाना क्षेत्र में छिनतई से जुड़ा है। प्रार्थी के 16 वर्षीय पुत्र को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। हालांकि बाद में बर्थ सर्टिफिकेट के आधार पर बच्चे को निचली अदालत के आदेश पर डुमरड्डागा स्थित बाल सुधार गृह में भेजा गया था।
प्रार्थी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर 20 लाख मुआवजा का दावा किया है। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता वेंकटेश कुमार ने पक्ष रखा. उनका कहना था कि सरकार अपना पक्ष रखने में बच रही है।
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