पटना : बिहार की राजनीति में मोकामा के विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। जेडीयू से छह साल के लिए बाहर किए जाने के बाद अब नीलम देवी को एक और बड़ा झटका लगा है। उन्हें 20 सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति के सदस्य पद से भी हटा दिया गया है। इस पद पर रहते हुए उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा मिला हुआ था। पहले पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया और अब पद भी छिन गया। इस कार्रवाई को अनंत सिंह और उनके परिवार के लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है। बिहार की सियासत में इस पूरे मामले को लेकर हलचल तेज हो गई है।
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नीलम देवी से वापस लिया गया राज्यमंत्री का दर्जा
नीलम देवी 20 सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति की सदस्य थीं। इसी पद के आधार पर उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा मिला हुआ था। वह विधायक नहीं होने के बावजूद इस दर्जे पर थीं। अब सम्राट सरकार ने उन्हें समिति से हटा दिया है, जिसके बाद उनका राज्यमंत्री का दर्जा भी समाप्त हो गया है। इससे पहले जेडीयू ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। इसके साथ ही अनंत सिंह की विधायिकी समाप्त करने की मांग को लेकर विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखे जाने की बात भी सामने आई थी।
अनंत सिंह की NDA में भूमिका पर सियासी चर्चा तेज
जेडीयू की कार्रवाई के बाद से ही अनंत सिंह को लेकर बिहार के सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज थीं। अब नीलम देवी को 20 सूत्री समिति से हटाए जाने के बाद राजनीतिक अटकलों को और बल मिला है। इसे सत्ताधारी गठबंधन में अनंत सिंह की राजनीतिक स्थिति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इस कार्रवाई के आधार पर अनंत सिंह को पूरे एनडीए से औपचारिक रूप से बाहर किए जाने का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसके लिए गठबंधन या संबंधित दलों की ओर से आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
सरकारी बंगले को लेकर भी चर्चा
इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच अनंत सिंह के सरकारी आवास को लेकर भी चर्चा हो रही है। खबरों के मुताबिक, हार्डिंग रोड स्थित जिस पुराने बंगले में वह रह रहे हैं, वह नीलम देवी के नाम पर आवंटित था। बताया जाता है कि विधायक के तौर पर अनंत सिंह को वीरचंद पटेल पथ पर विधायक फ्लैट नंबर 11/08 आवंटित किया गया था। इसके बावजूद वह हार्डिंग रोड स्थित पुराने बंगले में रह रहे थे। अब चर्चा है कि नीलम देवी को समिति से हटाए जाने के बाद इस बंगले के आवंटन पर भी असर पड़ सकता है।
हालांकि, बंगले का आवंटन रद्द होने या उसे खाली कराने को लेकर फिलहाल किसी आधिकारिक आदेश की पुष्टि आवश्यक है। ऐसे में इस संबंध में अंतिम स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है।




