रांची : साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों से लोगों को बचाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), रांची ने पहल की है। आज यानी बुधवार को रांची के कॉन्फ्रेंस हॉल में करीब 150 कार्यरत पैरा लीगल वॉलंटियर्स (पीएलवी) की बैठक हुई। एलएडीसी चीफ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आयोजित इस क्षमता निर्माण कार्यक्रम में साइबर अपराध के प्रति जागरूकता बढ़ाने, पीड़ितों को त्वरित कानूनी सहायता दिलाने और विधिक सेवा योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए। माननीय न्यायायुक्त के मार्गदर्शन और डालसा सचिव के नेतृत्व में आयोजित इस बैठक में पीएलवी के कामकाज की समीक्षा भी की गई। अधिकारियों ने उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में बेहतर तरीके से काम करने और जरूरतमंद लोगों तक सरकारी विधिक सहायता योजनाओं की जानकारी पहुंचाने को कहा।
डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी से बचाव की दी जानकारी
बैठक को संबोधित करते हुए डिप्टी एलएडीसी राजेश कुमार सिन्हा ने झालसा की डिजिटल अरेस्ट जागरूकता और पीड़ित सहायता योजना-2026 के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि देश में डिजिटल अरेस्ट और अन्य ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। नागरिकों को ऐसे अपराधों से सुरक्षित रखने और पीड़ितों को समय पर कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की गई है। उन्होंने बताया कि उच्चतम न्यायालय के हालिया दिशा-निर्देशों के तहत राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों और जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के माध्यम से इस योजना को देशभर में प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है।
राजेश कुमार सिन्हा ने योजना के प्रमुख उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लोगों को डिजिटल अरेस्ट घोटालों, साइबर अपराधियों के तौर-तरीकों और उनसे बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करना जरूरी है। इसके साथ ही साइबर ठगी के शिकार लोगों को तत्काल बैंक, पुलिस और साइबर सेल से संपर्क करने में मदद करना भी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। योजना के तहत ठगी की रकम को जालसाजों के बैंक खातों में तत्काल ब्लॉक या होल्ड कराने के लिए त्वरित संस्थागत व्यवस्था उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। समाज के कमजोर वर्गों, वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और दिव्यांगजनों को ठगी गई रकम की कानूनी रूप से वापसी के लिए मुफ्त विधिक सेवाएं उपलब्ध कराने की जानकारी भी दी गई।
हेल्पलाइन 1930 और ऑनलाइन शिकायत पर जोर
कार्यक्रम में पीएलवी को बताया गया कि डिजिटल अरेस्ट क्या है और इससे कैसे बचा जा सकता है। साइबर ठगी होने पर पीड़ित को तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए, इसकी भी जानकारी दी गई। इसके अलावा हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करने, ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने और ठगी से जुड़े सबूत सुरक्षित रखने के तरीकों के बारे में पीएलवी को जागरूक किया गया। अधिकारियों ने उन्हें निर्देश दिया कि वे अपने क्षेत्रों में लोगों तक इन जानकारियों को पहुंचाएं, ताकि साइबर अपराध के पीड़ित समय रहते सहायता प्राप्त कर सकें।
पीड़ित महिलाओं को मुआवजा दिलाने के निर्देश
एलएडीसी चीफ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव ने पीएलवी को निर्देश दिया कि वे ऐसी पीड़ित महिलाओं की पहचान करें, जिन्हें अब तक मुआवजा नहीं मिला है। ऐसी महिलाओं के आवेदन डालसा कार्यालय में जमा कराएं और उन्हें मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया में मदद करें। उन्होंने पीएलवी से सुदूरवर्ती क्षेत्रों में जाकर लोगों को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) और झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) की योजनाओं के बारे में जागरूक करने को कहा। साथ ही नशे से पीड़ित व्यक्तियों को नशामुक्ति केंद्र तक पहुंचाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया। प्रवीण कुमार श्रीवास्तव ने थानों में पीएलवी को आने वाली समस्याओं के समाधान पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी समस्याओं के निराकरण के लिए संबंधित सक्षम पदाधिकारियों से संपर्क कर समाधान सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जाए।
पीएलवी के कार्यों की समीक्षा, दिए गए दिशा-निर्देश
बैठक के अंत में सभी कार्यरत पीएलवी के कार्यों की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में जिम्मेदारी के साथ काम करने और जरूरतमंद लोगों को विधिक सहायता योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस अवसर पर एलएडीसी चीफ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, डिप्टी एलएडीसी राजेश कुमार सिन्हा, एलएडीसी सहायक पंकज कुमार शर्मा समेत जिला विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के सभी कार्यरत पीएलवी उपस्थित थे।



