जमशेदपुर : बिष्टुपुर के पीएम मॉल पर अब ताला लटकने की नौबत आ गई है। मॉल वालों ने टाटा स्टील का बकाया पैसा अब तक नहीं भरा है। इसके बाद कंपनी भी बकाया वसूलने के लिए मैदान में उतर गई है। टाटा स्टील का कहना है कि जमीन का किराया और सेस मिलाकर मॉल पर करीब 223 करोड़ रुपये बाकी हैं। आज यानी शुक्रवार को टाटा स्टील के लैंड डिपार्टमेंट के अधिकारी सरकारी कर्मचारियों के साथ पीएम मॉल पहुंचे और जमीन की नापी शुरू कर दी। इसी दौरान मॉल का पिछला दरवाजा भी सील कर दिया गया। बताया जा रहा है कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद यह कार्रवाई शुरू हुई है। मौके पर जमीन की लंबाई-चौड़ाई नापी जा रही है, ताकि हिसाब लगाया जा सके कि मॉल कितनी जमीन पर फैला हुआ है। इस पूरी कार्रवाई के दौरान टाटा स्टील के अधिकारी और सरकारी कर्मचारी मौके पर मौजूद रहे। अब देखना होगा कि इस कार्रवाई के बाद पीएम मॉल का आगे क्या होता है।
लंबे समय से बकाया है जमीन का किराया और सेस
मिली जानकारी के अनुसार टाटा स्टील ने पीएम मॉल को किराये पर जमीन दी थी। आरोप है कि जमीन के किराये और सेस की रकम लंबे समय से जमा नहीं की गई। इसके बाद मामला अदालत पहुंच गया। बताया जा रहा है कि अदालत ने टाटा स्टील के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बकाया राशि जमा करने का आदेश दिया था। इसके लिए 15 दिनों की समयसीमा तय किए जाने की बात भी सामने आई है।
भुगतान नहीं हुआ तो आगे बढ़ सकती है कार्रवाई
अगर बकाया रकम जमा नहीं की गई, तो पीएम मॉल के खिलाफ आगे भी कार्रवाई हो सकती है। हालांकि, मॉल को बंद करने को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद अधिकारियों ने मीडिया के कैमरे पर इस मामले में खुलकर कुछ भी कहने से परहेज किया। फिलहाल जमीन की मापी और दूसरी संबंधित प्रक्रिया जारी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
सबलीज की जमीन पर बना है पीएम मॉल
गौरतलब है कि पीएम मॉल टाटा स्टील की सबलीज वाली जमीन पर बना है। यह जमीन झारखंड सरकार की है, जिसे सबलीज पर पीएम मॉल को दिया गया है। बताया जाता है कि ऐसी ही सबलीज 59 उद्योगपतियों और अमीर लोगों को भी दी गई थी। सबलीज का यह मामला लंबे समय से विवादों में है। आरोप लगते रहे हैं कि टाटा स्टील ने नियमों का उल्लंघन कर जमीन की सबलीज दी थी। इस मामले में राजस्व विभाग ने जांच कराई थी और तत्कालीन डीसी अमिताभ कौशल ने जांच रिपोर्ट सरकार को भेजी थी। मामला हाई कोर्ट तक भी पहुंचा, लेकिन जांच रिपोर्ट पर अब तक कार्रवाई नहीं होने की बात कही जा रही है। इस बारे में पूछने पर प्रशासनिक अधिकारी यही बताते हैं कि मामला हाई कोर्ट में लंबित है।




