रांची: मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी और मतदाताओं के नाम हटाए जाने के विरोध में आज बुधवार को अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत रांची जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ताओं ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची में संशोधन के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग के खिलाफ जमकर घंटो नारेबाजी की।
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प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग का कथित रूप से दुरुपयोग करते हुए आम नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उनका विरोध किसी वास्तविक विदेशी नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटाने के खिलाफ नहीं है। यदि कोई बांग्लादेशी या अन्य विदेशी नागरिक है और वह मतदाता सूची में दर्ज है, तो नियमानुसार उसका नाम हटाया जाना चाहिए। लेकिन वैध भारतीय नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाना स्वीकार्य नहीं है।
हटाए गए नामों को दोबारा जोड़ने की मांग
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची से जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनके नाम दोबारा जुड़वाने के लिए पार्टी आंदोलन कर रही है। नेताओं के मुताबिक, मतदाता सूची में नाम होना प्रत्येक पात्र नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा विषय है और किसी भी पात्र मतदाता को प्रक्रिया संबंधी गड़बड़ी के कारण मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उन्हें इसकी जानकारी और उचित प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग की। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में कथित बदलाव लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों का आंदोलन जारी रहेगा।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची से जुड़े सवालों पर जब तक उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराती रहेगी।
झारखंड में 29 लाख नाम नहीं जुड़ने का दावा
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस विधायक ने दावा किया कि झारखंड में करीब 29 लाख मतदाताओं के नाम अभी तक मतदाता सूची में नहीं जोड़े गए हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक दलों के हित का मुद्दा नहीं है, बल्कि आम मतदाताओं, खासकर गरीब और वंचित वर्ग के अधिकारों से जुड़ा विषय है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सिर्फ वोट की राजनीति नहीं कर रही है, बल्कि ऐसे लोगों के अधिकारों के लिए भी संघर्ष कर रही है, जो मतदाता सूची से जुड़े मामलों के कारण प्रभावित हो सकते हैं।
भाजपा के आरोपों पर कांग्रेस का पलटवार
भाजपा की ओर से कांग्रेस पर प्रदर्शन के जरिए जनता को गुमराह करने के आरोपों पर भी कांग्रेस नेताओं ने पलटवार किया। उन्होंने बिहार और बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने से जुड़े विवादों का हवाला देते हुए कहा कि मतदाता सूची में बदलाव को लेकर उठाए जा रहे सवाल सार्वजनिक बहस का हिस्सा बन चुके हैं।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी होने पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम नागरिकों को भी सवाल उठाने और संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखने का अधिकार है।
विपक्षी दलों के अलग-अलग प्रदर्शन पर क्या कहा?
विपक्षी दलों द्वारा अलग-अलग समय पर प्रदर्शन किए जाने के सवाल पर कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों की अपनी कार्यशैली और कार्यक्रम तय करने का तरीका अलग है। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच व्यापक स्तर पर एकजुटता है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उनका आंदोलन मतदाता सूची की पारदर्शिता, पात्र मतदाताओं के अधिकार और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में लोगों का विश्वास बनाए रखने से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की और मतदाता सूची से हटाए गए नामों की समीक्षा की मांग दोहराई। इस माैके पर पूर्व केंंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, कुमाार रोशन सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और समर्थक शामिल थे।





