रांची: झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग में टाटा पावर कंपनी लिमिटेड से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने उपभोक्ताओं के हितों को सर्वोपरि रखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है. मामले में आम उपभोक्ताओं की अनुपस्थिति को देखते हुए आयोग ने उनकी पैरवी और हितों की रक्षा के लिए एक स्वतंत्र वकील को नियुक्त किया है।
श्वेता रानी नियुक्त हुईं ‘एमिकस क्यूरी‘
चूंकि सार्वजनिक नोटिस जारी करने के बावजूद आम उपभोक्ता या हितधारक सुनवाई में शामिल नहीं हुए, इसलिए आयोग ने मामले निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। अधिवक्ता श्वेता रानी को ‘एमिकस क्यूरी’ (न्याय मित्र) के रूप में नियुक्त किया गया है।
वह उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए आयोग का सहयोग करेंगी. अदालत में प्रत्येक पेशी के लिए उन्हें 5,000 रुपये कानूनी शुल्क के रूप में दिया जाएगा। खास बात यह है कि याचिकाकर्ता टाटा पावर ने स्वेच्छा से यह घोषणा की है कि एमिकस क्यूरी का यह कानूनी शुल्क वही वहन करेगा।
टाटा पावर को अतिरिक्त शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश
बहस के दौरान टाटा पावर के वकील ने आयोग को आश्वस्त किया कि कंपनी एक अतिरिक्त पूरक शपथ पत्र दाखिल करेगी। इस रिपोर्ट में केवल बॉयलर, टर्बाइन और जनरेटर ही नहीं, बल्कि पूरे प्लांट के ‘अवशिष्ट जीवन मूल्यांकन’ को पूरा करने की समय-सीमा शामिल किया जाएगा।
प्लांट में काम करने वाले कर्मचारियों और श्रमिकों की सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे सुरक्षा उपाय और फैक्ट्री इंस्पेक्टर की आधिकारिक जांच रिपोर्ट को भी शामिल किया जाएगा। एमिकस क्यूरी श्वेता रानी ने कहा है कि वह मामले का अध्ययन कर अगली तारीख पर अपनी दलीलें पेश करेंगी। दोनों पक्षों की सहमति और मामले की अगली कार्यवाहियों को देखते हुए आयोग ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 29 सितंबर की तिथि तय की है।









