धनबाद. पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए समाज, शैक्षणिक संस्थानों, वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, उद्योगों और आम लोगों को मिलकर प्रयास करना होगा। पर्यावरण और स्वास्थ्य एक-दूसरे से सीधे जुड़े हैं। स्वच्छ पानी, पौष्टिक भोजन, संतुलित जीवनशैली और स्वच्छ वातावरण स्वस्थ जीवन के आधार हैं। ये बातें राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने रविवार को आइआइटी-आइएसएम के गोल्डन जुबली हॉल में आयोजित राष्ट्रीय पर्यावरण कार्यशाला में कहीं।
जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता संरक्षण बड़ी चुनौती
आरोग्य भारती और आइआइटी-आइएसएम की ओर से आयोजित कार्यशाला में राज्यपाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण और जैव विविधता का संरक्षण आज बड़ी चुनौतियां हैं। झारखंड के जंगल, जलस्रोत, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधन राज्य की महत्वपूर्ण संपदा हैं। उन्होंने कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन विकास ऐसा होना चाहिए, जिसमें वर्तमान की जरूरतें पूरी होने के साथ आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित रहे।
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राज्यपाल ने मिशन लाइफ का उल्लेख करते हुए पानी और ऊर्जा बचाने, प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने तथा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने की अपील की। उन्होंने योग, संतुलित पोषण और स्वस्थ जीवनशैली को बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी बताया। साथ ही आइआइटी-आइएसएम जैसे तकनीकी संस्थानों से जल संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा, कचरा प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण अनुकूल तकनीक के क्षेत्र में रिसर्च और इनोवेशन बढ़ाने का आह्वान किया।
टिकाऊ विकास के लिए तकनीक पर जोर
आइआइटी-आइएसएम के निदेशक प्रो सुकुमार मिश्रा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को विकास से अलग करके नहीं देखा जा सकता. इसका सीधा संबंध स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, रोजगार और जीवन की गुणवत्ता से है। चुनौती विकास और पर्यावरण में से किसी एक को चुनने की नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और तकनीकी उपायों के जरिये विकास को टिकाऊ बनाने की है। उन्होंने रिसोर्स एफिशिएंसी, सर्कुलर इकोनॉमी, क्लीन टेक्नोलॉजी, रिन्यूएबल एनर्जी, जिम्मेदार माइनिंग, खदानों के पुनर्वास, वेस्ट-टू-रिसोर्स और जल संरक्षण पर जोर दिया।
स्वस्थ समाज के लिए बीमारी के इलाज के साथ बचाव और स्वस्थ जीवनशैली पर ध्यान देना जरूरी है
आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव अशोक कुमार वर्षने ने कहा कि स्वस्थ समाज के लिए बीमारी के इलाज के साथ बचाव और स्वस्थ जीवनशैली पर ध्यान देना जरूरी है. उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के चार प्रमुख विषय पेड़, पानी, प्लास्टिक और स्वच्छता को केंद्र में रखा। कहा कि बदलाव की शुरुआत व्यक्ति और परिवार से होनी चाहिए। पौधरोपण के साथ पौधों के संरक्षण, पानी के पुनर्चक्रण, रिचार्ज वेल बनाने और जल के बेहतर इस्तेमाल पर भी ध्यान देने की जरूरत है।
सुझावों को कार्ययोजना में बदलने पर जोर
कार्यशाला में देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे विशेषज्ञों, प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य और टिकाऊ विकास से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया. आयोजकों ने चर्चा से सामने आये सुझावों को व्यावहारिक कार्ययोजनाओं में बदलने पर जोर दिया। कार्यक्रम में आरोग्य भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राकेश पंडित, समाजसेवी विकास रंजन (पप्पू सिंह), कार्यक्रम संयोजक जयप्रकाश नारायण सिंह, अरुण राय समेत अन्य मौजूद थे।








