पर्यूषण महापर्व : उपासना दिवस पर आत्मदर्शन का संदेश, शुद्ध भावना पर दिया जोर

रांची : रांची में पर्यूषण महापर्व के चौथे दिवस ‘उपासना दिवस’ पर श्री साधुमार्गी जैन संघ की ओर से धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में स्वाध्यायी जी ने धर्म, आत्मसाधना, शुद्ध भावना और कर्मों की निर्जरा पर विस्तार से प्रकाश डाला। स्वाध्यायी जी ने

पर्यूषण महापर्व
पर्यूषण महापर्व में मिला आत्मसाधना और शुद्ध भावना का संदेश।

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रांची : रांची में पर्यूषण महापर्व के चौथे दिवस ‘उपासना दिवस’ पर श्री साधुमार्गी जैन संघ की ओर से धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में स्वाध्यायी जी ने धर्म, आत्मसाधना, शुद्ध भावना और कर्मों की निर्जरा पर विस्तार से प्रकाश डाला। स्वाध्यायी जी ने कहा कि जैसी हमारी भावना होती है, वैसी ही हमारी अवस्था बनती है और वैसा ही हमारा अगला भाव निर्धारित होता है। इसलिए हर व्यक्ति को दूसरों के प्रति सद्भाव, मैत्री और शुद्ध भावना रखनी चाहिए।

प्रदर्शन नहीं, आत्मदर्शन की ओर बढ़ें

स्वाध्यायी जी ने कहा कि किसी व्यक्ति के प्रति गलत भाव रखना स्वयं को ही गलत दिशा में ले जाता है। जीवन में प्रदर्शन, प्रतिस्पर्धा और प्रतिष्ठा की भावना से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन की प्रवृत्ति व्यक्ति को बाहरी दुनिया में उलझाती है, जबकि धर्म प्रदर्शन से आत्मदर्शन की ओर ले जाने की प्रेरणा देता है। हमारा ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि किसी कर्म से आत्मा कितनी निर्मल हो रही है, न कि लोग उसकी कितनी प्रशंसा करेंगे।

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भगवती सूत्र के महत्व पर प्रकाश

स्वाध्यायी जी ने श्री भगवती सूत्र के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह जैन आगम साहित्य के अत्यंत महत्वपूर्ण सूत्रों में से एक है, जिसमें भगवान महावीर ने अपने शिष्यों के असंख्य प्रश्नों का समाधान और उत्तर दिया है। उन्होंने श्रावक-श्राविकाओं से कहा कि आगमों का अध्ययन और श्रवण केवल ज्ञान प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि उसे जीवन में उतारने के लिए होना चाहिए। स्वाध्यायी जी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने अच्छे कर्मों पर ध्यान देना चाहिए। नाम और यश के लिए धार्मिक या सामाजिक कार्य नहीं करना चाहिए। दान देते समय भी नाम और प्रशंसा की इच्छा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सच्ची भावना से किया गया कार्य ही आत्मकल्याण का माध्यम बनता है। धार्मिक क्रिया के दौरान यदि मन में भौतिक वस्तुओं की लालसा या सांसारिक उपलब्धियों की इच्छा बनी रहती है तो उसका वास्तविक आध्यात्मिक फल प्राप्त नहीं हो पाता।

वाणी की शुद्धता और झूठ से बचने की सीख

स्वाध्यायी जी ने वाणी की शुद्धता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने वचनों में सत्यता और शुद्धता रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक झूठ को छिपाने के लिए व्यक्ति झूठ पर झूठ बोलता चला जाता है और धीरे-धीरे उसी मायाजाल में फंस जाता है। इससे अंततः उसका ही नुकसान होता है। इस संदर्भ में उन्होंने देवानंदा देवी के पूर्व जन्म का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि पूर्व जन्म में झूठ और छल-कपट के माध्यम से त्रिशला के आभूषण लेने का प्रयास करने के कर्म का परिणाम आगे चलकर उन्हें भुगतना पड़ा। भगवान महावीर के गर्भ से संबंधित प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने श्रावक-श्राविकाओं को कर्म सिद्धांत की गंभीरता समझाई। उन्होंने कहा कि इस जन्म में की गई गलती का फल भविष्य में भी भोगना पड़ सकता है।

गजसुकुमाल मुनि के समभाव से मिली प्रेरणा

पर्यूषण के पिछले दिनों अंतःगड़ सूत्र के वाचन के दौरान बताए गए गजसुकुमाल मुनि के प्रसंग की भावभूमि को आगे बढ़ाते हुए स्वाध्यायी जी ने समभाव और क्षमा का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जैन दर्शन विपरीत परिस्थितियों में भी समभाव और क्षमा बनाए रखने की शिक्षा देता है। आत्मसाधना का वास्तविक स्वरूप यही है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन हों, व्यक्ति के भीतर क्रोध, द्वेष और प्रतिशोध को स्थान नहीं मिलना चाहिए।

भजन और तप अनुमोदना

कार्यक्रम में ओसवाल संघ के मंत्री विमल दस्सानी ने आत्मा को साधना में रत रहने की प्रेरणा देने वाला गीत प्रस्तुत किया। गीत के माध्यम से आत्मचिंतन, साधना और आत्मकल्याण का संदेश दिया गया। घेवरचंद जी नहाटा ने पर्यूषण महापर्व के दौरान चल रही विभिन्न तपस्याओं की अनुमोदना की और तपस्वियों के प्रति मंगलभाव व्यक्त किया। वहीं प्रकाश चंद जी नहाटा ने श्रावक-श्राविकाओं को अधिक से अधिक तपस्या करने और आत्मसाधना के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

तपस्या में श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा

पर्यूषण महापर्व के अवसर पर श्रद्धालुओं ने तपस्या में भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। ममता पींचा, विशाल दस्सानी, खुशबू दस्सानी एवं पूजा बोहरा का चतुर्थ दिवस का उपवास रहा। सरिता दस्सानी एवं छोटेलाल चोरड़िया का तीन दिवसीय उपवास पूर्ण हुआ। छोटेलाल चोरड़िया एवं मोहनलाल जी पींचा आठ दिवसीय मौन व्रत कर रहे हैं। वहीं पायल कोठारी एवं 12 वर्षीय नाहर बेगानी का तीन दिवसीय उपवास रहा। उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने सभी तपस्वियों के तप की अनुमोदना की और उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं आत्मकल्याण की मंगलकामना की।

16 सितंबर को रक्तदान शिविर

कार्यक्रम के दौरान तेरापंथ युवक परिषद की ओर से सामाजिक सेवा के तहत आयोजित होने वाले रक्तदान शिविर की जानकारी दी गई। बताया गया कि 16 सितंबर को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक दिगंबर जैन भवन के ग्राउंड फ्लोर पर रक्तदान शिविर आयोजित किया जाएगा। अधिक से अधिक लोगों से रक्तदान कर इस सेवा कार्य में सहभागी बनने का आह्वान किया गया।

100 से अधिक श्रावक-श्राविकाएं शामिल

कार्यक्रम का संचालन राजेश जी पींचा ने किया। इस अवसर पर ललित पींचा, मोहन लाल नहाटा, लाल चंद बोथरा, भास्कर पींचा, राकेश सुराणा, बसंत दस्सानी और प्रदीप चोरड़िया सहित अनेक गणमान्यजन मौजूद रहे। कार्यक्रम में 100 से अधिक श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता की। पर्यूषण महापर्व के चौथे दिवस का संदेश आत्मदर्शन, आत्मसाधना और कर्मों की निर्जरा पर केंद्रित रहा।

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