रांची। झारखंड के पूर्व सीएम मधु कोड़ा से जुड़े बहुचर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने विस्तृत सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। पूर्व सीएम द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने प्रार्थी (मधु कोड़ा) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनीं और इसके बाद आदेश सुरक्षित रखने का निर्णय लिया।
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निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में दी गई है चुनौती
मामले की सुनवाई के दौरान प्रार्थी मधु कोड़ा की ओर से अधिवक्ता नवीन कुमार सिंह ने पक्ष रखा। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरभ कुमार ने अदालत में दलीलें पेश कीं। मालूम हो कि पूर्व सीएम मधु कोड़ा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर ईडी द्वारा तय की गई मनी लॉन्ड्रिंग की राशि पर सवाल उठाते हुए उसे चुनौती दी है। इससे पूर्व, निचली अदालत (विशेष पीएमएलए कोर्ट) ने ईडी के आरोप पत्र (चार्जशीट) में दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग की राशि में संशोधन करने संबंधी उनकी अर्जी को खारिज कर दिया था। निचली अदालत के इसी फैसले के खिलाफ मधु कोड़ा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
क्या है मनी लॉन्ड्रिंग की राशि से जुड़ा मुख्य विवाद?
पूर्व सीएम का तर्क है कि ईडी द्वारा चार्जशीट में दर्शाई गई मनी लॉन्ड्रिंग की कुल राशि और वास्तविक तथ्यों में अंतर है, इसलिए इसमें संशोधन किया जाना अनिवार्य है। दूसरी ओर, ईडी ने कोर्ट में दलील दी कि निचली अदालत का फैसला पूरी तरह नियमों के अनुरूप है और जांच में सामने आए पुख्ता सबूतों व आधारों पर ही चार्जशीट तैयार की गई है। दोनों पक्षों की तीखी कानूनी बहस सुनने और दर्ज करने के बाद अदालत अब अपना अंतिम आदेश जारी करेगी, जिस पर झारखंड के राजनीतिक और कानूनी गलियारों की निगाहें टिकी हुई हैं।






