चमोली (उत्तराखंड) : हिमालयी महाकुंभ के रूप में विश्वविख्यात मां नंदा देवी की ऐतिहासिक ‘बड़ी जात यात्रा’ शनिवार को उत्तराखंड के चमोली जिले स्थित सिद्धपीठ कुरुड़ से अपने ससुराल कैलाश (हिमालयी क्षेत्र) के लिए विधिवत रवाना हो गई। सिद्धपीठ कुरुड़ में पांच दिनों तक चले विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के बाद जैसे ही मां नंदा की पवित्र डोली रवाना हुई, पूरा क्षेत्र ‘जय मां नंदा’ के गगनभेदी जयकारों और पारंपरिक ढोल-दमाऊ की गूंज से भक्तिमय हो उठा। मां की विदाई के इस भावुक क्षण में हजारों श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
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विश्व की सबसे लंबी 280 किलोमीटर की पैदल यात्रा
मां नंदा देवी की यह यात्रा दुनिया की सबसे लंबी पैदल धार्मिक यात्राओं में से एक मानी जाती है, जो लगभग 280 किलोमीटर के दुर्गम पर्वतीय रास्तों से होकर गुजरती है। आम तौर पर वार्षिक लोकजात यात्रा के दौरान मां की डोली विभिन्न पड़ावों से होते हुए वेदनी कुंड तक ही जाती है। लेकिन इस बार आयोजित हो रही ‘बड़ी जात यात्रा’ के तहत डोली का मार्ग आगे बढ़ाते हुए इसे सीधे उच्च हिमालयी क्षेत्र ‘होमकुंड’ तक ले जाया जाएगा।
12 साल बाद आयोजन
12 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आयोजित हो रही इस बड़ी जात यात्रा को लेकर न केवल चमोली और गढ़वाल-कुमाऊं, बल्कि पूरे देश-विदेश से श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचे हैं। यात्रा के निर्धारित पड़ावों पर ग्रामीण और स्थानीय श्रद्धालु मां नंदा की डोली का भव्य स्वागत करेंगे और अपने मायके से ससुराल लौट रही नंदा देवी का आशीर्वाद लेंगे।
30 सितंबर को होमकुंड में होगा मुख्य समापन
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, प्रतिवर्ष बसंत पंचमी के दिन नंदा देवी लोकजात यात्रा की तिथियां तय की जाती हैं। इस वर्ष की बड़ी जात यात्रा का मुख्य धार्मिक अनुष्ठान 30 सितंबर 2026 को होमकुंड में संपन्न होगा। होमकुंड में विशेष पूजा-अर्चना, आहुति और धार्मिक प्रक्रियाओं को पूरा करने के साथ ही इस महायात्रा का औपचारिक समापन किया जाएगा।




