काठमांडू : भारत के उत्तरी पड़ोसी देश नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के एक सप्ताह बाद भी तबाही का मंजर बना हुआ है। आज यानी बुधवार तक इस प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,127 हो गई है, जबकि लगभग 3,900 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। हिमालयी क्षेत्र में राहत और बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं। नेपाल पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, चितवन से 348, नवलपरासी पूर्व से 217, नवलपरासी पश्चिम से 190 और नुवाकोट से 155 शव बरामद किए गए हैं। इसके अलावा गोरखा, धादिंग, रसुवा और तनाहूं जिलों से भी दर्जनों शव मिले हैं।
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ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन को बताया वजह
नेपाल के पीएम बालेन्द्र ‘बालेन’ शाह ने कहा कि रसुवा स्थित भोटेकोशी नदी में आई यह भीषण तबाही सीधे तौर पर वैश्विक जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से जुड़ी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि हिमालयी क्षेत्र के तापमान में हुई 1.8 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि इस आपदा का मुख्य कारण बनी। विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक ऊंचाई पर बर्फ और चट्टान का बड़ा हिस्सा टूटने से नीचे के इलाकों में अचानक प्रलयंकारी जलप्रलय आया, जिसे नेपाल सरकार ने “हिमालयन सुनामी” का नाम दिया है।
मदद नहीं, भारत-चीन और अमेरिका से मुआवजा चाहता है नेपाल
इस मानवीय त्रासदी के बीच नेपाल सरकार ने वैश्विक कूटनीति में बड़ा बदलाव किया है। नेपाल ने वैश्विक समुदाय से केवल सहायता मांगने के बजाय मुआवजे की मांग रखी है। काठमांडू ने दुनिया में सबसे ज्यादा ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन करने वाले तीन प्रमुख देशों भारत, चीन और अमेरिका को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा, “हम अपने राजनयिक ढांचे को केवल वित्तीय मदद से बदलकर न्याय और मुआवजे की दिशा में ले जा रहे हैं। बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का यह दायित्व है कि वे उन कम उत्सर्जन वाले देशों को मुआवजा दें जो जलवायु आपदाओं का नुकसान झेल रहे हैं।” नेपाल ने इसके लिए संयुक्त राष्ट्र के ‘लॉस एंड डैमेज फंड’ से भी औपचारिक संपर्क साधा है।
UNGA में मुद्दा उठाएंगे पीएम बालेन शाह
जलवायु न्याय और मुआवजे की मांग को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से रखने के लिए नेपाल के पीएम बालेन शाह 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में भाग लेने न्यूयॉर्क जा सकते हैं। इससे पहले विदेश मंत्री शिशिर खनाल के जाने की योजना थी, लेकिन इस आपदा के गंभीर असर को देखते हुए अब पीएम खुद UN में नेपाल का पक्ष रखेंगे।
5 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान
नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले के अनुसार, इस बाढ़ से देश के रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों में घर, सड़कें, पुल और कई पनबिजली परियोजनाएं पूरी तरह तबाह हो गई हैं। प्रारंभिक अनुमानों के मुताबिक, इस तबाही से उबरने और पुनर्वास के लिए नेपाल को 4 से 5 अरब डॉलर की जरूरत होगी, जो देश की कुल अर्थव्यवस्था (GDP) का लगभग 10 प्रतिशत है।





