पारसनाथ पहाड़ को लेकर आदिवासी समुदाय का विरोध तेज, आंदोलन की चेतावनी

गिरिडीह : झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित मारांग बुरू पारसनाथ पहाड़ पर स्वामित्व और अधिकारों को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। पहाड़ पर विश्व जैन संगठन के अध्यक्ष संजय जैन द्वारा किए गए दावे के खिलाफ आदिवासी समुदाय का विरोध तेज

पारसनाथ पहाड़
आदिवासी मोर्चा ने उठाई आवाज।

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गिरिडीह : झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित मारांग बुरू पारसनाथ पहाड़ पर स्वामित्व और अधिकारों को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। पहाड़ पर विश्व जैन संगठन के अध्यक्ष संजय जैन द्वारा किए गए दावे के खिलाफ आदिवासी समुदाय का विरोध तेज हो गया है। सोमवार को ‘मारांग बुरू बचाओ संघर्ष मोर्चा’ ने गिरिडीह के न्यू परिसदन में प्रेस वार्ता कर इस मुद्दे पर अपना कड़ा रुख स्पष्ट किया है।

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‘पारसनाथ पहाड़ हमारा मारांग बुरू है’

प्रेस वार्ता में मोर्चा के सदस्यों ने दो टूक शब्दों में कहा कि पारसनाथ पहाड़ संथाल आदिवासियों का मारांग बुरू है और यह सदियों से उनके लिए अगाध आस्था का केंद्र रहा है। वक्ताओं ने कहा कि संथाल समुदाय पीढ़ियों से यहां पूजा-अर्चना करता आ रहा है। पूरे मारांग बुरू पारसनाथ क्षेत्र में 24 से अधिक टोले हैं, जहां आज भी आदिवासी समाज की पारंपरिक ‘माझी’ (प्रधान) व्यवस्था लागू है।

‘न्यायालय और दस्तावेजों में आदिवासियों के अधिकार’

आदिवासी नेताओं ने स्पष्ट किया कि न्यायालय ने भी संथाल आदिवासियों के प्रथागत और पैतृक अधिकारों को मान्यता दी है। सरकारी दस्तावेजों और ऐतिहासिक संदर्भों में भी मारांग बुरू का उल्लेख मिलता है। संविधान के अनुच्छेद 14 और 25 का हवाला देते हुए मोर्चा ने कहा कि केंद्र या राज्य सरकार द्वारा किसी एक समुदाय के पक्ष में एकतरफा विशेष आदेश जारी करना सर्वथा अनुचित है। उन्होंने जैन समुदाय पर आरोप लगाया कि वे अपने धार्मिक दावे को मजबूत करने के लिए संथाल आदिवासियों के पारंपरिक अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं।

आंदोलन की चेतावनी

मोर्चा ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि जैन समुदाय के पक्ष में जारी किसी भी एकतरफा आदेश की समीक्षा कर उसे तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। इसके साथ ही मारांग बुरू पारसनाथ को आदिवासियों का प्राचीन धार्मिक स्थल घोषित कर उनके प्रथागत अधिकारों को संरक्षण प्रदान किया जाए। वक्ताओं ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने इस दिशा में सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो आदिवासी समुदाय अपने अधिकारों और धार्मिक आस्था की रक्षा के लिए व्यापक जन आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। प्रेस वार्ता के दौरान मोर्चा के अध्यक्ष महावीर मुर्मू, सचिव विष्णु किस्कू, प्रवक्ता सुधीर बास्के, सुरेश हेमराम, मदन हेमराम, सुशांत प्रसाद सोरेन और दिलीप मुर्मू समेत कई अन्य प्रमुख लोग मौजूद रहे।

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