रामगढ़ : जिले के बरकाकाना थाना क्षेत्र के हेहल स्थित स्पंज आयरन फैक्टरी के पावर प्लांट में हुए भीषण टरबाइन ब्लास्ट के बाद इलाके में तनाव और आक्रोश का माहौल है। हादसे में तीन इंजीनियरों की मौत हो गई, जबकि एक इंजीनियर गंभीर रूप से घायल है। घटना के बाद मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा, घायल के बेहतर इलाज और हादसे की उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है। घटना के तुरंत बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण, स्थानीय लोग और फैक्टरी के मजदूर मुख्य गेट पर जुट गए। मृतकों के परिजनों के समर्थन में बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी भी फैक्टरी गेट पर धरने पर बैठ गए। उनके साथ मृतकों के परिजन, ग्रामीण और फैक्टरी कर्मचारी भी धरने में शामिल हुए।
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मुआवजे और परिजनों के भविष्य की मांग
धरने पर बैठे लोगों ने कहा कि इतने बड़े औद्योगिक संयंत्र में हुई दुर्घटना के बाद केवल औपचारिक जांच या खानापूर्ति नहीं होनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने मृतक इंजीनियरों के परिवारों को सम्मानजनक और पर्याप्त मुआवजा देने तथा उनके आश्रितों के भविष्य की जिम्मेदारी प्रबंधन द्वारा उठाने की मांग की। बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी ने कहा कि प्रथम दृष्टया घटना में फैक्टरी प्रबंधन की लापरवाही सामने आती दिख रही है। उन्होंने फैक्टरी में सुरक्षा मानकों के पालन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए। विधायक ने कहा कि मृतकों के परिजनों को कम से कम डेढ़ से दो करोड़ रुपये का उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। जिन परिवारों में छोटे बच्चे हैं, उनके भरण-पोषण और शिक्षा की जिम्मेदारी भी फैक्टरी प्रबंधन को उठानी चाहिए।
फैक्टरी की सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
रोशन लाल चौधरी ने कहा कि औद्योगिक इकाइयों की निगरानी के लिए श्रम, सुरक्षा, प्रदूषण समेत अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद हैं। इसके बावजूद फैक्टरी में इस तरह का भीषण हादसा होना गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने दावा किया कि पूर्व में भी फैक्टरी की व्यवस्थाओं को लेकर शिकायतें और सूचनाएं दी गई थीं। विधायक के अनुसार, एसी के काम नहीं करने की जानकारी के बाद कथित तौर पर वैकल्पिक व्यवस्था के नाम पर कूलर लगाया गया और बाद में निरीक्षण की प्रक्रिया पूरी कर एनओसी दे दी गई। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। विधायक ने कहा कि यदि जांच में प्रबंधन की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही सरकारी अधिकारी या विभाग की ओर से निरीक्षण में खानापूर्ति, लापरवाही या नियमों की अनदेखी सामने आने पर संबंधित अधिकारियों की भी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

पूरे रामगढ़ की औद्योगिक इकाइयों की जांच की मांग
रोशन लाल चौधरी ने कहा कि यह घटना केवल एक फैक्टरी तक सीमित नहीं है। उन्होंने रामगढ़ जिले की सभी फैक्ट्रियों और औद्योगिक इकाइयों की उच्चस्तरीय एवं स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि जांच में सुरक्षा, श्रम कानून, प्रदूषण नियंत्रण, अग्नि सुरक्षा और अन्य निर्धारित मानकों के पालन की स्थिति देखी जानी चाहिए। इसके साथ ही यह भी जांच होनी चाहिए कि संबंधित इकाइयों को किन परिस्थितियों में एनओसी और अन्य स्वीकृतियां दी गईं। विधायक ने कहा कि केवल फैक्टरी प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराकर मामला खत्म नहीं किया जाना चाहिए। यदि सरकारी तंत्र की लापरवाही या निरीक्षण में खानापूर्ति सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
मजदूरों में भी आक्रोश, सड़क जाम
हादसे के बाद फैक्टरी में काम करने वाले मजदूरों में भी आक्रोश है। मजदूरों का कहना है कि औद्योगिक इकाई में उत्पादन से पहले कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। टरबाइन ब्लास्ट ने फैक्टरी की तकनीकी निगरानी, सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन इंतजामों पर सवाल खड़े किए हैं। मजदूरों ने निष्पक्ष जांच और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की है। फैक्टरी के मुख्य गेट पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों, मजदूरों और परिजनों के धरने के बाद पुलिस और प्रशासन की गतिविधियां बढ़ गई हैं। इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। आक्रोशित ग्रामीणों ने पतरातू-रामगढ़ मुख्य मार्ग को भी जाम कर दिया। प्रबंधन की ओर से अब तक सकारात्मक पहल नहीं होने के कारण ग्रामीणों में नाराजगी बनी हुई है। स्थानीय पुलिस लोगों को समझाने का प्रयास कर रही है। फिलहाल सभी की नजरें प्रबंधन और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल मृतकों के परिजनों की मुआवजे की मांग और हादसे की जांच किस स्तर पर कराए जाने को लेकर है।




