रांची: ट्रांसफर के बाद करीब नौ माह से वेतन भुगतान नहीं होने के मामले को झारखंड हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए झारखंड राज्य कृषि उत्पादन पर्षद के MD और चेयरमैन को 14 अक्टूबर को अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
मामला मार्केटिंग सुपरवाइजर रमेश कुमार शर्मा के ट्रांसफर और उसके बाद वेतन भुगतान से जुड़ा है। अदालत ने यह जानना चाहा है कि झारखंड राज्य कृषि उत्पादन पर्षद में ट्रांसफर-पोस्टिंग का सक्षम प्राधिकारी कौन है।
MD के ट्रांसफर आदेश के बाद कोडरमा में किया ज्वाइन
प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता प्रेम पुजारी ने अदालत को बताया कि रमेश कुमार शर्मा का 30 दिसंबर 2025 को गढ़वा से कोडरमा मार्केटिंग समिति में ट्रांसफर किया गया था। यह आदेश पर्षद के MD की ओर से जारी हुआ था।
ट्रांसफर आदेश के बाद रमेश कुमार शर्मा ने 1 जनवरी 2026 को कोडरमा मार्केटिंग समिति में योगदान दे दिया। इसके बाद जब उन्होंने वेतन भुगतान की मांग की तो उन्हें बताया गया कि गढ़वा से उनका LPC यानी Last Pay Certificate प्राप्त नहीं हुआ है।
LPC देने के बाद भी नहीं हुआ वेतन भुगतान
प्रार्थी की ओर से बाद में गढ़वा से जारी LPC उपलब्ध कराया गया। इसके बावजूद वेतन का भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
सुनवाई के दौरान कोडरमा मार्केटिंग समिति के सचिव की ओर से दाखिल शपथ पत्र में बताया गया कि गढ़वा से कोडरमा ट्रांसफर का आदेश मई 2026 में चेयरमैन की ओर से रद्द कर दिया गया था। इसी वजह से प्रार्थी का वेतन भुगतान नहीं हो पाने की बात कही गई।
ट्रांसफर रद्द करने के अधिकार पर हाईकोर्ट का सवालमामले की सुनवाई के दौरान
हाईकोर्ट ने ट्रांसफर आदेश रद्द किए जाने के अधिकार को लेकर सवाल उठाया। अदालत ने कहा कि यदि किसी सक्षम प्राधिकारी की ओर से ट्रांसफर आदेश जारी होने के बाद उसका क्रियान्वयन भी हो चुका है, तो उसे बाद में रद्द किए जाने के आधार को स्पष्ट करना होगा।
अदालत ने यह भी पूछा कि जब पर्षद के MD को ट्रांसफर आदेश जारी करने का सक्षम प्राधिकारी बताया जा रहा है, तो चेयरमैन किस नियम के तहत उस आदेश को रद्द कर सकते हैं।
14 अक्टूबर को MD और चेयरमैन की होगी पेशी
मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की गई है। हाईकोर्ट ने झारखंड राज्य कृषि उत्पादन पर्षद के MD और चेयरमैन को उस दिन अदालत में उपस्थित होने को कहा है।
अब अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि ट्रांसफर-पोस्टिंग के लिए पर्षद में किसे सक्षम प्राधिकारी माना गया है और ट्रांसफर आदेश रद्द करने के लिए चेयरमैन के पास क्या वैधानिक अधिकार है।