रांची। भारत माता के जयकारों के साथ रविवार को राजधानी में निकाली गई तिरंगा यात्रा में रक्षा राज्य मंत्री के साथ बड़ी संख्या में आम लोग, युवा और बच्चे शामिल हुए। जहां हाथों में तिरंगा लेकर निकले लोगों में देशभक्ति का उत्साह देखते ही बन रहा था। तिरंगा यात्रा में शामिल हर व्यक्ति पूरे जोश के साथ अपने हाथों में तिरंगा लेकर पूरी उमंग और देश भक्ति के जजबा के साथ पूरी राजधानी को देश भक्ति के रंग में रंग दिया था।
तिरंगा हमारी देश की आन, बान और शान है: रक्षा राज्य मंत्री
तिरंगा यात्रा में शामिल रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि तिरंगा देश की आन, बान और शान है। हाथ में तिरंगा आते ही मन में देश के प्रति गौरव और सम्मान का भाव पैदा होता है। उन्होंने कहा कि जब देशवासी एक साथ भारत माता की जय और वंदे मातरम का उद्घोष करते हैं, तो राष्ट्रभक्ति की भावना और मजबूत होती है।
देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों का जिक्र करते हुए कहा कि हजारों किलोमीटर लंबी सीमा पर हमारे जवान बेहद कठिन परिस्थितियों में देश की रक्षा करते हैं। माइनस 40 डिग्री तापमान में भी सैनिक अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटते। उनके लिए सबसे ऊपर देश और भारत माता है। ऐसे में देशवासियों का भी कर्तव्य है कि वे राष्ट्र के प्रति अपने दायित्व को समझें।
तिरंगा केवल एक झंडा नहीं, बल्कि देश की एकता, अखंडता और गौरव का प्रतीक है
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभर में तिरंगा यात्राएं निकाली जा रही हैं। इन यात्राओं का उद्देश्य लोगों में राष्ट्रीय भावना और देश के प्रति जागरूकता को और मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि तिरंगा केवल एक झंडा नहीं, बल्कि देश की एकता, अखंडता और गौरव का प्रतीक है। आजादी के अमृत काल में देश में गुलामी की मानसिकता से बाहर निकलने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में औपनिवेशिक मानसिकता से जुड़े कई प्रतीकों और सोच में बदलाव लाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय का पता 7 रेस कोर्स रोड से बदलकर लोक कल्याण मार्ग किया गया। इसी तरह कई राजभवनों को लोक भवन के नाम से जाना जाने लगा है।
संजय सेठ ने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए लोगों में कर्तव्य भाव का होना जरूरी है। केवल अधिकारों की बात करने के बजाय नागरिकों को अपने कर्तव्यों को भी समझना होगा। जब प्रत्येक नागरिक देश के प्रति अपने कर्तव्य को प्राथमिकता देंगे, तभी राष्ट्र मजबूत होगा।



