जन्मदिन पर लवलीना बोरगोहेन का बड़ा कमाल, एशियाई खेलों में जीता स्वर्ण पदक

नई दिल्ली : भारतीय महिला मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने अपने जन्मदिन पर खुद को स्वर्ण पदक का यादगार तोहफा दिया। लवलीना ने एशियन गेम्स 2026 के 75 किलोग्राम भारवर्ग के फाइनल में चीन की बाओ जियी को 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से हराकर गोल्ड मेडल

लवलीना बोरगोहेन
लवलीना बोरगोहेन ने 75 किलो वर्ग में जीता स्वर्ण

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नई दिल्ली : भारतीय महिला मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने अपने जन्मदिन पर खुद को स्वर्ण पदक का यादगार तोहफा दिया। लवलीना ने एशियन गेम्स 2026 के 75 किलोग्राम भारवर्ग के फाइनल में चीन की बाओ जियी को 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से हराकर गोल्ड मेडल जीता। वहीं, परवीन हुड्डा ने 65 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में जीत दर्ज कर भारत को एक और स्वर्ण पदक दिलाया। इन दोनों जीत के साथ एशियाई खेलों में महिला मुक्केबाजी के स्वर्ण पदक का भारत का 12 साल का इंतजार खत्म हुआ।

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भारत की सफल मुक्केबाजों में शामिल ओलंपिक पदक विजेता लवलीना ने अपने 29वें जन्मदिन को खास बना दिया। उन्होंने पिछले एशियाई खेलों में जीते रजत पदक का रंग स्वर्ण में बदल दिया। दूसरी ओर, परवीन ने पेरिस ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता चीनी ताइपे की नियेन चिन चेन को कड़े मुकाबले में 3-2 के विभाजित फैसले से हराकर इन खेलों का अपना पहला स्वर्ण पदक जीता। इस जीत के साथ लवलीना और परवीन एशियाई खेलों में मुक्केबाजी का स्वर्ण जीतने वाली भारतीय महिला मुक्केबाजों की विशिष्ट श्रेणी में शामिल हो गईं। उनसे पहले महान मुक्केबाज एमसी मैरी कॉम ने 2014 के इंचियोन एशियाई खेलों में 51 किलोग्राम फ्लाइवेट वर्ग का स्वर्ण पदक जीता था।

जन्मदिन पर गोल्ड जीतकर खुश हुईं लवलीना

जीत के बाद लवलीना ने कहा, ”आज मेरा जन्मदिन है। यह मेरे लिए बेहद खास जन्मदिन है और मैं बहुत अच्छा महसूस कर रही हूं। मैंने सोचा था कि जन्मदिन पर खुद को स्वर्ण पदक का तोहफा दूंगी। पहली बार मैंने खुद को कोई तोहफा दिया है। मैंने अपना सब कुछ झोंक दिया। एक पल के लिए भी नहीं सोचा कि मैं हार सकती हूं।” उन्होंने कहा, ”मुकाबला बहुत कठिन था, लेकिन मेरे दिमाग में सिर्फ यही चल रहा था कि मुझे जीतना है। आखिरी राउंड बहुत मुश्किल था। पहले और दूसरे राउंड में मैं 2-1 से आगे थी, इसलिए मैंने सोचा कि अब मुझे सिर्फ तीसरा राउंड जीतना है।” लवलीना ने कहा, ”मेरी प्रतिद्वंद्वी बहुत मजबूत थी और मैं पहली बार उसके खिलाफ खेल रही थी। इसलिए मुझे पता नहीं था कि वह किस तरह से मुकाबला करेगी। मैं खुद को लगातार प्रेरित कर रही थी कि मुझे जीतना है, मैं हारना नहीं चाहती।”

बाओ के खिलाफ लवलीना ने अपनाई आक्रामक रणनीति

लवलीना ने अपनी लंबाई का भरपूर फायदा उठाया। वहीं, बाओ लगातार दूरी कम करने और भारतीय मुक्केबाज को मुक्के चलाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं देने की कोशिश करती रहीं। इसके चलते मुकाबला कई बार उलझा हुआ नजर आया और बाओ ने बार-बार क्लिंच का सहारा लिया। आमतौर पर रक्षात्मक अंदाज में खेलने वाली लवलीना ने इस मुकाबले में आक्रामक शुरुआत की और शुरुआती दौर में ही कुछ सटीक मुक्के जड़े। बाओ ने भी पलटवार में कोई कमी नहीं छोड़ी।

चीन की खब्बू मुक्केबाज ने कुछ अच्छे जवाबी हमले किए, लेकिन लवलीना ने राउंड के आखिरी हिस्से में जोरदार वापसी करते हुए सटीक और दमदार पंच लगाए। उन्होंने 3-2 से पहला राउंड अपने नाम किया। दूसरे राउंड में पिछड़ने के बाद बाओ ने आक्रामक रुख अपनाते हुए दूरी कम करने की कोशिश की। लवलीना ने उन्हें दूर रखते हुए अपने मुक्कों के लिए जगह बनाने की रणनीति अपनाई। राउंड के आखिरी हिस्से में भारतीय मुक्केबाज ने सही दूरी तलाश ली और लगातार सटीक प्रहार करते हुए जजों के स्कोरकार्ड पर 4-1 से बढ़त बना ली।

अंतिम राउंड में भी यही सिलसिला जारी रहा। बाओ ने बड़ी संख्या में मुक्के चलाए, लेकिन उन्हें साफ तरीके से निशाने पर लगाने में परेशानी हुई। लवलीना ने मजबूत डिफेंस के साथ अपने मौके का इंतजार किया और सही समय पर पलटवार किया। बढ़त मजबूत करने के बाद लवलीना ने मुकाबले के अंतिम क्षणों में रफ्तार धीमी कर दी। अनावश्यक रूप से भिड़ने से बचते हुए उन्होंने बाओ को दूरी पर रखा और मुकाबला अपने नाम कर लिया। पिछले एशियाई खेलों में लवलीना को चीन की एक अन्य मुक्केबाज ली कियान के खिलाफ फाइनल में हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा था। इस बार उन्होंने उस नतीजे को दोहराने का कोई मौका नहीं दिया।

भारतीय मुक्केबाजों ने अब तक छह पदक किए पक्के

आइची-नागोया में भारतीय मुक्केबाजों ने पिछले एशियाई खेलों के प्रदर्शन में सुधार करते हुए अब तक छह पदक पक्के कर लिए हैं। प्रिया घंघास (60 किग्रा), कपिल पोखरिया (90 किग्रा) और नरेंद्र बरवाल (90 किग्रा से अधिक) ने कांस्य पदक जीते हैं। एशियाई खेलों में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाजी प्रदर्शन 2010 के ग्वांगझोउ खेलों में रहा था। उस समय भारतीय दल ने कुल नौ पदक जीते थे, जिनमें दो स्वर्ण, तीन रजत और चार कांस्य पदक शामिल थे। महाद्वीपीय प्रतियोगिता में भारतीय मुक्केबाजों का यह प्रदर्शन पिछले महीने ग्लास्गो में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में रिकॉर्डतोड़ अभियान के बाद आया है।

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