रांची: रांची के धुर्वा, कांके और गेतलसूद डैम की जमीन पर अतिक्रमण और जल स्रोतों के संरक्षण से जुड़ी जनहित याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले में एमिकस क्यूरी इंद्रजीत सिन्हा और राज्य सरकार से अब तक कोर्ट के आदेश के अनुपालन में की गई कार्रवाई का विवरण मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को होगी।
तीनों डैम की जमीन पर अतिक्रमण का मामला
सुनवाई के दौरान पूर्व में राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया था कि रांची के तीन प्रमुख जलाशयों धुर्वा डैम, कांके डैम और गेतलसूद डैम की जमीन पर अतिक्रमण से संबंधित रिपोर्ट रांची उपायुक्त की ओर से दाखिल की जा चुकी है। इससे पहले हाईकोर्ट ने रांची डीसी को विस्तृत शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया था।
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अदालत ने शपथ पत्र में तीनों डैम परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित जमीन का सटीक विवरण, नक्शा, अतिक्रमित भूमि का सर्वे नंबर सहित पूरा ब्योरा और अतिक्रमण हटाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी थी।
धुर्वा डैम की जमीन पर अतिक्रमण मामले में ACB की जांच जारी
सुनवाई के दौरान एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की ओर से धुर्वा डैम परियोजना की जमीन पर अतिक्रमण से संबंधित प्राथमिकी की जांच की सीलबंद रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की गई थी।
ACB के अधिवक्ता सुमीत गडोदिया ने अदालत को बताया था कि हाईकोर्ट के 7 जनवरी 2026 के आदेश के बाद नगड़ी थाना कांड संख्या 21/2026 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस मामले में जांच अभी जारी है।
जिला स्कूल में पानी टंकी निर्माण के दौरान दो मजदूरों की मौत का मामला भी उठा
सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ता झारखंड सिविल सोसाइटी की ओर से अधिवक्ता शुभम कटारूका ने रांची जिला स्कूल में पुराने पानी टंकी को तोड़कर नई टंकी बनाने के दौरान दो मजदूरों की मौत का मामला उठाया। उन्होंने अदालत को बताया कि यह घटना पेयजल विभाग और ठेकेदार की कथित लापरवाही के कारण हुई। इस घटना को भी जल स्रोतों और पेयजल से जुड़े सरकारी कार्यों की निगरानी तथा जवाबदेही के संदर्भ में अदालत के समक्ष रखा गया।
29 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
रांची के तीन प्रमुख जलाशयों की जमीन पर अतिक्रमण और जल स्रोतों के संरक्षण से संबंधित इस जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने अब तक की कार्रवाई का विस्तृत विवरण मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
अदालत की ओर से पहले ही अधिग्रहित भूमि, अतिक्रमण और उसे हटाने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण मांगा जा चुका है। अब अगली सुनवाई में राज्य सरकार और एमिकस क्यूरी की ओर से प्रस्तुत जानकारी के आधार पर आगे की कार्यवाही होगी।





