तिब्बत में 7 तीव्रता का भूकंप, 16 की मौत और 32 लोग घायल

नागकू : तिब्बत में बीती रात 7 तीव्रता के भूकंप से भारी तबाही मच गई। मिली जानकारी के अनुसार इस प्राकृतिक आपदा में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि 32 लोग घायल हुए हैं। घायलों में 11 की हालत नाजुक बताई

भूकंप
सांकेतिक फोटो

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नागकू : तिब्बत में बीती रात 7 तीव्रता के भूकंप से भारी तबाही मच गई। मिली जानकारी के अनुसार इस प्राकृतिक आपदा में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि 32 लोग घायल हुए हैं। घायलों में 11 की हालत नाजुक बताई जा रही है। भूकंप का सबसे ज्यादा असर उत्तरी तिब्बत के नागकू शहर में देखने को मिला, जहां सैकड़ों मकान ढह गए।

भूकंप का केंद्र 173 किलोमीटर की गहराई में था

नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक, भारतीय समयानुसार रात करीब 8:03 बजे भूकंप आया। इसका केंद्र तिब्बत की राजधानी ल्हासा से करीब 400 किलोमीटर दूर उत्तरी तिब्बत के नागकू शहर में था। भूकंप का केंद्र जमीन से लगभग 173 किलोमीटर की गहराई में बताया गया है।

नागकू शहर में 339 मकान ढहे

भूकंप के झटके महसूस होते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। मकान और गाड़ियां हिलने लगे, जिसके बाद लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों और होटलों से बाहर निकल आए। दुकानों में लगे सीसीटीवी कैमरों में सामान रैक से नीचे गिरते हुए भी कैद हुआ। नागकू मीडिया कार्यालय ने शहर सरकार के अधिकारियों के हवाले से बताया कि भूकंप के बाद कम से कम 339 मकान ढह गए हैं। मलबे में फंसे लोगों की तलाश और बचाव अभियान जारी है। विस्थापित लोगों को ठहराने के लिए टेंट भी लगाए जा रहे हैं।

पांच साल में तिब्बत का सबसे बड़ा भूकंप

बताया जा रहा है कि पिछले पांच वर्षों में तिब्बत क्षेत्र में आया यह सबसे बड़ा भूकंप है। भूकंप से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव का काम जारी है। प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों के लिए अस्थायी ठहरने की व्यवस्था भी की जा रही है।

हाल ही में बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित हुआ था इलाका

तिब्बत में यह भूकंप ऐसे समय आया है, जब कुछ हफ्ते पहले नेपाल और चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की सीमा के पास बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई थी। इन आपदाओं में 1,400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी, जबकि हजारों लोगों के लापता होने की खबर सामने आई थी।

तिब्बत में बार-बार क्यों आते हैं भूकंप?

तिब्बत भूकंप के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है। इसकी प्रमुख वजह भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच होने वाली हलचल है। ये दोनों प्लेटें एक-दूसरे की ओर बढ़ती हैं और इनके टकराव से हिमालय पर्वत का निर्माण हुआ है। इसी भूगर्भीय गतिविधि के कारण इस क्षेत्र में भूकंप आने का खतरा बना रहता है।

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