बेंगलुरु: बेंगलुरु के विद्यारण्यपुरा से इसी साल जनवरी महीने में संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुई प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज की दो छात्राओं को अपराध जांच विभाग (CID) ने आखिरकार खोज निकाला है। 8 महीने से चल रही तलाश के क्रम में 100 से अधिक ठिकानों पर पुलिस छापेमारी की थी।
जनवरी में दोनों छात्राओं के गायब होने के बाद परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने 10 सदस्यीय विशेष टीम का गठन किया था। पुलिस ने मुंबई, चेन्नई, कोयंबटूर, दिल्ली, काशी, केरल, चामराजनगर और मैसूर सहित 100 से अधिक स्थानों पर तलाशी ली। लड़कियां अपने मोबाइल फोन और एटीएम कार्ड का इस्तेमाल नहीं कर रही थीं, जिससे जांच में काफी दिक्कतें आ रही थीं।
CID को सौंपी गई थी जांच
स्थानीय पुलिस द्वारा छात्राओं का सुराग न लगा पाने पर परिजनों ने कर्नाटक हाईकोर्ट का रुख किया। अदालत के निर्देश के बाद जांच CID को सौंप दी गई।जांच में सामने आया कि घर से भागने के बाद दोनों छात्राएं चामराजनगर स्थित मले महादेश्वर हिल्स पहुंची थीं। वहाँ उनकी मुलाकात कनकपुरा के एक युवक से हुई। तनिष्का ने पारिवारिक परिस्थितियों के दबाव के कारण युवक को बताया कि वे दोनों बहनें और अनाथ हैं।
युवक ने उनकी बात पर भरोसा कर लिया। दोनों को अपने साथ ले गया। बाद में युवक ने तनिष्का से शादी कर ली, जबकि तेजस्विनी उनके साथ बहन की तरह रहने लगी।
ऐसे मिला सुराग
मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब तनिष्का ने नया सिम कार्ड लेने के लिए अपने असली आधार कार्ड का इस्तेमाल किया। CID पहले से ही दोनों गुमशुदा छात्राओं के आधार विवरण की निगरानी कर रही थी।
जैसे ही सिम कार्ड जारी हुआ, टेलीकॉम सेवा प्रदाता कंपनी ने अधिकारियों को अलर्ट कर दिया। आधार की जानकारी और नेटवर्क लोकेशन के आधार पर CID की टीम ने ठिकाने पर छापा मारकर दोनों छात्राओं को कस्टडी में ले लिया।






