रांची : राजधानी रांची की सीमा के समीप स्थित हेसाहातु गांव (पश्चिम बंगाल) से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। बंद कमरे में मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती (Mosquito Coil) जलाकर सोना एक परिवार के लिए जानलेवा साबित हुआ। कमरे में जहरीला धुआं भरने और ऑक्सीजन की कमी के कारण दम घुटने से परिवार के चारों सदस्य बेहोश हो गए। इनमें से तीन लोगों की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है और वे मुरी के एक अस्पताल में वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं।
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खिड़की-दरवाजे बंद कर सो गया था परिवार
घटना के संबंध में मिली जानकारी के मुताबिक, गुरुवार रात अशोक दत्ता (47) अपनी पत्नी लक्ष्मी (42), बेटी ब्यूटी (14) और बेटे महावीर (12) के साथ खाना खाने के बाद एक ही कमरे में सोने गए थे। इलाके में मच्छरों के अत्यधिक प्रकोप से राहत पाने के लिए उन्होंने कमरे के अंदर मच्छर रोधी अगरबत्ती जला ली और बाहर की हवा रोकने के लिए खिड़की तथा दरवाजे पूरी तरह बंद कर लिए।
सुबह 9 बजे तक नहीं खुला दरवाजा, बच्चे ने दिखाई हिम्मत
रात भर कमरे के भीतर कार्बन मोनोऑक्साइड और जहरीला धुआं इकट्ठा होता रहा। शुक्रवार सुबह 9 बजे तक जब घर का कोई भी सदस्य बाहर नहीं निकला, तो आसपास के पड़ोसियों को किसी अनहोनी का संदेह हुआ। ग्रामीणों ने काफी देर तक मुख्य दरवाजा खटखटाया। अंततः जहरीले धुएं से आंशिक रूप से प्रभावित 12 वर्षीय बेटे महावीर ने किसी तरह हिम्मत जुटाकर दरवाजा खोला। दरवाजा खोलते ही अंदर का दृश्य भयावह था, परिवार के बाकी तीनों सदस्य बेसुध पड़े हुए थे।
झालदा से मुरी रेफर, 3 लोग वेंटिलेटर पर
स्थानीय ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए सभी पीड़ितों को तुरंत झालदा सरकारी अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद मरीजों की अति गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें तत्काल मुरी स्थित सिंगपुर नर्सिंग होम रेफर कर दिया। फिलहाल अशोक दत्ता, उनकी पत्नी और बेटी की हालत अत्यंत चिंताजनक है और उन्हें लाइफ सपोर्ट (वेंटिलेटर) पर रखा गया है।








