नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में बिहार के लिए 3,591 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण सड़क परियोजना को मंजूरी दी गई। इसके तहत मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा खंड के 82.578 किलोमीटर हिस्से को चार लेन हाईवे में अपग्रेड किया जाएगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल के मुताबिक, यह परियोजना उत्तर बिहार के प्रमुख इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी देगी और नेपाल सीमा के नजदीक स्थित क्षेत्रों तक पहुंच आसान बनाएगी। इससे यात्रियों को बेहतर सड़क सुविधा मिलने के साथ व्यापार और माल ढुलाई को भी गति मिलने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि परियोजना का उद्देश्य सड़क परिवहन की क्षमता बढ़ाने, ट्रैफिक का दबाव कम करने और लोगों के लिए सुरक्षित एवं बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है।
इन इलाकों में कम होगा ट्रैफिक दबाव
कैबिनेट के अनुसार, चार लेन कॉरिडोर बनने के बाद मुजफ्फरपुर, मुक्सुदपुर, रुन्नीसैदपुर, थुम्मा, डुमरा, भुतही और सोनबरसा जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में यातायात का दबाव कम होगा। सरकार ने कहा कि एनएच-22 का मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा खंड रणनीतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है। यह राष्ट्रीय माल ढुलाई ग्रिड से निर्बाध संपर्क उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाता है। परियोजना से बरौनी जैसे औद्योगिक क्षेत्रों और नदी आधारित लॉजिस्टिक्स हब तक कनेक्टिविटी मजबूत होगी। साथ ही, भीथामोर स्थित लैंड पोर्ट के माध्यम से सीमा पार यात्रियों और माल की आवाजाही को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
पीएम गति-शक्ति केंद्रों से जुड़ेगा कॉरिडोर
उन्नत सड़क कॉरिडोर पांच पीएम गति-शक्ति आर्थिक केंद्रों से कनेक्टिविटी बढ़ाएगा। इनमें चार औद्योगिक संपदाएं और एक मेगा फूड पार्क शामिल हैं। इसके अलावा बाबा गरीबनाथ मंदिर, माता जानकी मंदिर, पुनाउरा धाम और मुजफ्फरपुर व सीतामढ़ी के आकांक्षी जिले जैसे सामाजिक केंद्र भी बेहतर सड़क संपर्क से जुड़ेंगे। मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी रेलवे स्टेशन जैसे दो प्रमुख लॉजिस्टिक केंद्रों तक भी पहुंच आसान होगी। बेहतर सड़क संपर्क से वस्तुओं और कृषि उत्पादों की आवाजाही तेज होने तथा क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इस परियोजना से बौद्ध सर्किट और सीतामढ़ी स्थित ऐतिहासिक जानकी पुनाउरा धाम मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों तक पहुंच भी बेहतर होगी।
100 किमी प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड
कैबिनेट के अनुसार, नए कॉरिडोर को 100 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन गति और 80 किलोमीटर प्रति घंटे की औसत गति के हिसाब से तैयार किया जाएगा। इसमें एट-ग्रेड मीडियन ओपनिंग नहीं होगी, जिससे तेज और सुरक्षित यातायात सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। परियोजना में सात प्रमुख पुलों का निर्माण भी शामिल है। इनमें बारहमासी बागमती नदी पर 340 मीटर लंबा एक प्रमुख पुल शामिल है। इसके अलावा तीन रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) और दो फ्लाईओवर बनाए जाएंगे। बता दें कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए रेल और सड़क क्षेत्र की कुल 13,000 करोड़ रुपये की पांच महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
इसके साथ ही पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में भारतीय रेलवे की क्षमता बढ़ाने के लिए चार मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को भी स्वीकृति दी गई है। इन परियोजनाओं की अनुमानित लागत करीब 9,450 करोड़ रुपये है और इन्हें 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि यह निवेश देश के महत्वपूर्ण हिस्सों में कनेक्टिविटी मजबूत करेगा और आर्थिक विकास को गति देगा। परियोजनाओं के पूरा होने के बाद रेल नेटवर्क में करीब 410 किलोमीटर की अतिरिक्त क्षमता जुड़ने की उम्मीद है, जिससे व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रेनों की आवाजाही और माल परिवहन अधिक सुगम होगा।








