वंदे मातरम विवाद में बढ़ी सियासी गर्मी, सोनिया गांधी पर निशाना

एआईसीसी मुख्यालय में वंदे मातरम बजने के दौरान सोनिया गांधी की कथित प्रतिक्रिया को लेकर भाजपा और जेडीयू नेताओं ने कांग्रेस पर हमला बोला।

पटना, एआईसीसी मुख्यालय में ‘वंदे मातरम’ बजने के दौरान कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और सीपीपी चेयरपर्सन सोनिया गांधी की कथित प्रतिक्रिया को लेकर बिहार में सियासत तेज हो गई है। एनडीए के नेताओं ने आरोप लगाया है कि सोनिया गांधी ने ‘वंदे मातरम’ को रोकने का इशारा किया, जिसे उन्होंने राष्ट्रगीत का अपमान बताया है।बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि वोट-बैंक की राजनीति के नाम पर ‘वंदे मातरम’ का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह हमारा राष्ट्रगीत है और स्वतंत्रता सेनानियों ने इसे गाया था।

भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर साधा निशाना

संजय सरावगी ने कांग्रेस मुख्यालय में शुरुआती दो पद गाए जाने के बाद सामने आए दृश्य का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं की जितनी निंदा की जाए, कम है। उन्होंने केरल में हुई घटना का भी उल्लेख किया और ‘वंदे मातरम’ के सम्मान पर जोर दिया।बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने भी सोनिया गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘वंदे मातरम’ गाए जाने के दौरान सोनिया गांधी ने हाथों के इशारे से इसे रोकने की कोशिश की।रामकृपाल यादव ने कहा कि सोनिया गांधी कांग्रेस की वरिष्ठ नेता हैं और राहुल गांधी पार्टी के शीर्ष नेताओं में हैं। उनके मुताबिक, कांग्रेस मुख्यालय में जो दृश्य सामने आया, उससे यह संदेश गया कि सोनिया गांधी ‘वंदे मातरम’ सुनना बर्दाश्त नहीं कर पा रही थीं।भाजपा नेता आरपी सिंह ने कहा कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को समान सम्मान दिया जाता है। उन्होंने कहा कि जो भी इसकी अवहेलना करेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

शाहनवाज हुसैन और जेडीयू ने भी कांग्रेस को घेरा

भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि आजादी की लड़ाई के दौरान लोगों ने ‘वंदे मातरम’ का नारा लगाते हुए बलिदान दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस कार्यालय में सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने ‘वंदे मातरम’ को पूरा गाए जाने के दौरान इसे रोकने की कोशिश की।वहीं, जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन राष्ट्रगीत का सम्मान सभी को करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसद के दोनों सदनों से प्रस्ताव पारित होने और राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद सभी को कानून और उससे जुड़े प्रावधानों का सम्मान करना चाहिए।राजीव रंजन ने कहा कि यदि कोई राजनीतिक दल या नेता इससे अलग व्यवहार करता है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। इस पूरे विवाद को लेकर भाजपा और जेडीयू के नेताओं ने कांग्रेस से जवाब की मांग की है।

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