नई दिल्ली। दिनभर दफ्तर में घंटों कंप्यूटर पर बैठकर काम करने से पीठ और रीढ़ से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं। ऐसे में नियमित योगाभ्यास शरीर को सक्रिय और लचीला बनाए रखने में मदद कर सकता है। भुजंगासन, जिसे अंग्रेजी में Cobra Pose कहा जाता है, योग का एक प्रमुख आसन है। यह खास तौर पर रीढ़, छाती, कंधों और पेट की मांसपेशियों पर काम करता है।
क्या है भुजंगासन?
भुजंगासन में शरीर का ऊपरी हिस्सा ऊपर की ओर उठाया जाता है, जिससे मुद्रा फन फैलाए हुए सांप जैसी दिखाई देती है। इसी वजह से इसे कोबरा पोज कहा जाता है। यह आसन पेट के बल लेटकर किया जाता है और शरीर में खिंचाव के साथ-साथ लचीलेपन को बढ़ाने में मदद करता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, भुजंगासन रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीला बनाने, पाचन तंत्र को बेहतर रखने और श्वसन क्षमता को बढ़ाने में सहायक हो सकता है। नियमित अभ्यास से शरीर में ऊर्जा और फुर्ती महसूस हो सकती है।
भुजंगासन के फायदे
भुजंगासन का नियमित और सही तरीके से अभ्यास करने पर कई संभावित फायदे मिल सकते हैं।
- रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन को बनाए रखने में मदद करता है।
- पीठ और कंधों की मांसपेशियों में खिंचाव देता है।
- छाती को खोलने में मदद करता है, जिससे सांस लेने की प्रक्रिया बेहतर महसूस हो सकती है।
- पेट की मांसपेशियों पर काम करता है और पाचन के लिए सहायक हो सकता है।
- लंबे समय तक बैठे रहने से होने वाली जकड़न को कम करने में मदद कर सकता है।
- शरीर को सक्रिय और ऊर्जावान बनाए रखने में सहायक है।
- तनाव और थकान को कम करने में मदद मिल सकती है।
कैसे करें भुजंगासन?
भुजंगासन करने के लिए सबसे पहले पेट के बल सीधे लेट जाएं। दोनों पैरों को पीछे की ओर सीधा रखें और उनके बीच आरामदायक दूरी रखें। अब दोनों हथेलियों को छाती के पास जमीन पर टिकाएं।
इसके बाद धीरे-धीरे सांस लेते हुए सिर, गर्दन और छाती को ऊपर की ओर उठाएं। शरीर को उतना ही पीछे की ओर मोड़ें, जितना आरामदायक हो। कंधों को कानों से दूर रखें और अपनी क्षमता के अनुसार कुछ समय इस मुद्रा में रहें। इस दौरान सामान्य रूप से सांस लेते रहें।
इसके बाद धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए छाती और सिर को नीचे लाएं और शुरुआती स्थिति में लौट जाएं। कुछ क्षण आराम करने के बाद दोबारा अभ्यास किया जा सकता है।
किन बातों का रखें ध्यान?
भुजंगासन करते समय शरीर पर जरूरत से ज्यादा दबाव नहीं डालना चाहिए। कमर या रीढ़ में दर्द महसूस होने पर आसन रोक दें। योगासन का अभ्यास सही तकनीक के साथ करना जरूरी है। किसी चोट, गंभीर पीठ की समस्या या अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानी की स्थिति में विशेषज्ञ या प्रशिक्षित योग शिक्षक की सलाह लेकर ही अभ्यास करें।








