जंग में ईरान को हुआ 270 अरब डॉलर का नुकसान, संयुक्त राष्ट्र में उठाई मुआवजे की मांग

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जेनेवा: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान का दावा करते हुए करीब 270 अरब डॉलर के मुआवजे की मांग की है. यह मांग संयुक्त राष्ट्र में उठाई गई, जहां ईरान के प्रतिनिधि ने आरोप लगाया कि हमलों में न केवल अमेरिका और इजराइल, बल्कि कुछ क्षेत्रीय देशों की भी भूमिका रही है.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ईरान सरकार की प्रवक्ता फातमेह मोहाजेरानी ने कहा कि 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद देश को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से भारी नुकसान हुआ है. उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि युद्ध के कारण बुनियादी ढांचे, व्यापार और तेल निर्यात पर गंभीर असर पड़ा है, जिससे नुकसान का आंकड़ा 270 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. संयुक्त राष्ट्र में ईरान के दूत ने दावा किया कि पांच क्षेत्रीय देशों की जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमले करने के लिए किया गया. ऐसे में इन देशों को भी इस नुकसान की भरपाई करनी चाहिए. हालांकि, इन देशों के नाम सार्वजनिक रूप से नहीं बताए, जिससे क्षेत्र में कूटनीतिक तनाव और बढ़ सकता है.

इस बीच ईरान ने मुआवजा वसूलने के लिए एक नया प्रस्ताव रखा है. इसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर टैक्स लगाने की योजना है. यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है, इसलिए इस प्रस्ताव के लागू होने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजार पर व्यापक असर पड़ सकता है. हालांकि इस बढ़ते तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच संभावित बातचीत की भी खबरें सामने आ रही हैं. क्षेत्रीय देशों की ओर से मध्यस्थता के प्रयास जारी हैं, लेकिन ईरान फिलहाल अपने रुख पर कायम है और पहले नुकसान की भरपाई की मांग कर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विवाद जल्द नहीं सुलझा, तो इसका असर न केवल मध्य पूर्व, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर भी पड़ सकता है.

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अंग भारत • रिपोर्टर

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