सीआईपी रांची को राष्ट्रीय महत्त्व का संस्थान बनाने की मांग राज्यसभा में उठी

नई दिल्ली/रांची : राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने शुक्रवार को राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान झारखंड की राजधानी रांची स्थित केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान (सीआईपी) को संसद के पृथक अधिनियम के माध्यम से राष्ट्रीय महत्त्व का संस्थान घोषित करने की मांग उठाई। उन्होंने संस्थान

सीआईपी

नई दिल्ली/रांची : राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने शुक्रवार को राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान झारखंड की राजधानी रांची स्थित केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान (सीआईपी) को संसद के पृथक अधिनियम के माध्यम से राष्ट्रीय महत्त्व का संस्थान घोषित करने की मांग उठाई। उन्होंने संस्थान को वैधानिक, शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता प्रदान करने के लिए समयबद्ध कार्रवाई का आग्रह किया।

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डॉ. वर्मा ने सदन के माध्यम से केंद्र सरकार का ध्यान इस विषय की ओर आकर्षित करते हुए कहा कि वर्ष 1918 में स्थापित सीआईपी देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों में शामिल है। संस्थान मानसिक रोगों के उपचार के साथ मनोचिकित्सा, नैदानिक मनोविज्ञान, मनोचिकित्सीय सामाजिक कार्य, नर्सिंग, पुनर्वास, तंत्रिका विज्ञान और जन-मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में लंबे समय से सेवाएं दे रहा है।

हर साल 1.17 लाख से अधिक रोगियों का होता है उपचार

डॉ. वर्मा ने कहा कि 108 वर्ष पुराना यह संस्थान हर वर्ष 1,17,000 से अधिक रोगियों का उपचार करता है। इनमें करीब 80 प्रतिशत रोगी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित हैं। देश में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती जरूरत का उल्लेख करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की “Accidental Deaths & Suicides in India–2024” रिपोर्ट का भी हवाला दिया। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में देश में कुल 1,70,746 आत्महत्याएं दर्ज की गईं।

पेशागत श्रेणियों में 52,910 दिहाड़ी मजदूर, 22,113 गृहिणियां, 17,886 स्वरोजगार से जुड़े व्यक्ति, 16,905 पेशेवर एवं वेतनभोगी व्यक्ति, 14,778 बेरोजगार, 14,488 विद्यार्थी, 12,811 निजी क्षेत्र के कर्मचारी, 11,015 व्यवसाय से जुड़े व्यक्ति और कृषि क्षेत्र से जुड़े 10,546 व्यक्ति शामिल थे। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े बताते हैं कि आत्महत्या की समस्या विद्यार्थियों, श्रमिकों, किसानों, बेरोजगारों, कर्मचारियों, गृहिणियों और स्वरोजगार से जुड़े लोगों समेत समाज के विभिन्न वर्गों को प्रभावित कर रही है। ऐसे में सुलभ, विशिष्ट और संस्थागत मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की तत्काल जरूरत है।

डॉ. वर्मा ने सदन को बताया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संबंधी विभागीय संसदीय स्थायी समिति ने अपनी 148वीं रिपोर्ट “Mental Health Care and Its Management in Contemporary Times” में सीआईपी रांची को राष्ट्रीय महत्त्व का संस्थान घोषित करने की स्पष्ट अनुशंसा की है। यह मांग राज्यसभा में 8 दिसंबर 2023 को विशेष उल्लेख के माध्यम से भी उठाई जा चुकी है। उन्होंने केंद्रीय बजट 2026-27 में रांची और तेजपुर स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों को क्षेत्रीय शीर्ष संस्थानों के रूप में उन्नत करने की घोषणा का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह घोषणा सीआईपी को वैधानिक, शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता देने की दिशा में आगे बढ़ने का उपयुक्त अवसर है।

339.302 एकड़ भूमि के अंतर की जांच की मांग

भूमि से जुड़े अभिलेखों का उल्लेख करते हुए डॉ. वर्मा ने कहा कि वर्तमान रिकॉर्ड के अनुसार केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान, रांची के अधीन लगभग 229.29 एकड़ और रांची तंत्रिका मनोचिकित्सा एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान के अधीन करीब 322.94 एकड़ भूमि उपलब्ध बताई गई है। दोनों संस्थानों के अधीन उपलब्ध भूमि का संयुक्त क्षेत्रफल 552.23 एकड़ है। उन्होंने कहा कि गजट और पुराने भूमि अभिलेखों में दर्ज कुल 891.532 एकड़ भूमि तथा वर्तमान में दोनों संस्थानों के अधीन उपलब्ध 552.23 एकड़ भूमि के बीच 339.302 एकड़ का अंतर दिखाई देता है। इस अंतर वाली भूमि की वर्तमान राजस्व स्थिति, स्वामित्व, हस्तांतरण और वास्तविक कब्जे की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

डॉ. वर्मा ने कहा कि संसद पहले भी अलग केंद्रीय कानून बनाकर कई महत्त्वपूर्ण चिकित्सा संस्थानों को राष्ट्रीय महत्त्व का संस्थान घोषित कर चुकी है। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका-विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु (निमहांस) को राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका-विज्ञान संस्थान, बंगलौर अधिनियम, 2012 यानी निमहांस अधिनियम, 2012 के तहत यह दर्जा दिया गया है। इसी तरह अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान अधिनियम, 1956 यानी एम्स अधिनियम, 1956 के माध्यम से राष्ट्रीय महत्त्व के संस्थान का दर्जा मिला है। बाद में स्थापित अन्य एम्स संस्थानों को भी अधिनियम में किए गए संशोधनों के जरिए यह दर्जा प्रदान किया गया।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान, रांची के लिए भी इसी तरह की विधायी पहल संवैधानिक और संस्थागत दृष्टि से पूरी तरह उपयुक्त होगी। राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि सीआईपी रांची को संसद के पृथक अधिनियम के माध्यम से राष्ट्रीय महत्त्व का संस्थान घोषित किया जाए। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य, तंत्रिका विज्ञान, शिक्षण, प्रशिक्षण, अनुसंधान और रोगी देखभाल के क्षेत्र में संस्थान को आवश्यक वैधानिक, शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता देने के लिए समयबद्ध कार्रवाई की जाए।

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